AI Summit Protest
AI Summit Protest: राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए ‘शर्टलेस’ प्रदर्शन ने अब कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है। शनिवार, 21 फरवरी 2026 को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार चार प्रमुख कार्यकर्ताओं को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। अदालत ने मामले की गंभीरता और पुलिस की दलीलों को स्वीकार करते हुए चारों आरोपियों को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। इस घटना के बाद से ही देशभर में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है और भाजपा कार्यकर्ता अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
अदालती कार्यवाही के दौरान दिल्ली पुलिस के वकील ने एक चौंकाने वाला दावा किया। पुलिस ने अदालत को बताया कि यह प्रदर्शन आकस्मिक नहीं था, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल के ‘GenZ’ आंदोलन की तर्ज पर सुनियोजित तरीके से किया गया था। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल देश विरोधी नारे लगाए, बल्कि ‘देश को बांटने’ वाली विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिश की। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपियों ने जानबूझकर उस स्थान को चुना जहाँ विदेशी प्रतिनिधि और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की भारी मौजूदगी थी, ताकि वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल किया जा सके।
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दलील दी कि गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों में बिहार से युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि, कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश के अजय कुमार और तेलंगाना के नरसिम्हा यादव शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आपत्तिजनक तस्वीरों वाली टी-शर्ट पहनी हुई थी और समिट के दौरान अपनी शर्ट उतारकर ‘पीएम इज कंप्रोमाइज’ जैसे विवादित नारे लगाए। इस हंगामे को रोकने की कोशिश कर रहे सुरक्षाकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की की गई, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने कोर्ट से कहा कि आरोपियों के मोबाइल फोन बरामद करना और साजिश की तह तक जाना बेहद जरूरी है।
जब अदालत ने पुलिस से पांच दिन की लंबी रिमांड का कारण पूछा, तो जांच एजेंसी ने बताया कि आरोपी अलग-अलग राज्यों (बिहार, यूपी और तेलंगाना) से ताल्लुक रखते हैं। पुलिस को संदेह है कि इस विरोध प्रदर्शन के पीछे एक गहरी साजिश है। जांच अधिकारी यह पता लगाना चाहते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम की रूपरेखा किसने तैयार की, फंडिंग कहाँ से आई और विवादित टी-शर्ट्स कहाँ छपवाई गईं। पुलिस का मानना है कि आरोपियों को उनके गृह राज्यों में ले जाकर साक्ष्य जुटाना और अन्य संदिग्धों की पहचान करना आवश्यक है।
दूसरी ओर, यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के वकीलों ने रिमांड की मांग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि यह गिरफ्तारी लोकतंत्र की गरिमा को कम करने वाली है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि विरोध प्रदर्शन के आधार पर गिरफ्तारियां होने लगीं, तो संसद के भीतर अपनी आवाज उठाने वाले सांसदों को भी इसी तरह सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। वकील ने पुलिस के दावों को अतिशयोक्तिपूर्ण करार दिया।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में हुए इस हंगामे के बाद कांग्रेस पार्टी बुरी तरह विवादों में घिर गई है। जिस समय यह प्रदर्शन हुआ, वहां गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों के सीईओ और कई देशों के मंत्री मौजूद थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने भारत की आंतरिक राजनीति का एक नकारात्मक पक्ष पेश किया है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक हताशा के कारण देश के मान-सम्मान को दांव पर लगा रही है, जबकि कांग्रेस इसे जनहित की आवाज बता रही है।
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