Social Media Crackdown : वर्तमान समय में सोशल मीडिया का दायरा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक तेजी से फैला है, लेकिन यह लत युवा पीढ़ी के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए इंडोनेशिया सरकार ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपनी नीतियों में कड़ाई करनी पड़ी है। इस कार्रवाई का असर इतना व्यापक रहा कि 16 साल से कम उम्र के लाखों किशोरों के सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद कर दिया गया है। यह कदम न केवल बच्चों को डिजिटल खतरों से बचाने के लिए उठाया गया है, बल्कि यह कंपनियों के लिए अपनी सुरक्षा नीतियों को दुरुस्त करने का एक सख्त संकेत भी है।

लाखों अकाउंट्स पर चली डिजिटल कैंची
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडोनेशिया में नए सरकारी नियमों के प्रभावी होते ही प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इन नए सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए टिकटॉक (TikTok) ने सर्वाधिक कार्रवाई की है और लगभग 41 लाख अकाउंट्स को बंद कर दिया है। वहीं, वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब (YouTube) ने भी 6 लाख से अधिक कम उम्र के यूजर्स के अकाउंट्स को हटा दिया है। इन 47 लाख से अधिक अकाउंट्स को बंद करने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को अनुचित कंटेंट और ऑनलाइन दुर्व्यवहार से बचाना है। इंडोनेशियाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस प्रकार की निगरानी जारी रहेगी ताकि किशोरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ी
इस नए नियम की सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी ‘जवाबदेही’ (Accountability) है। पहले उम्र के सत्यापन की जिम्मेदारी मुख्य रूप से अभिभावकों और स्कूलों पर होती थी, लेकिन अब सरकार ने इस बोझ को सोशल मीडिया कंपनियों के कंधों पर डाल दिया है। नए नियमों के तहत, यह अनिवार्य कर दिया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खुद ही उन अकाउंट्स की पहचान करें जो निर्धारित आयु सीमा (16 वर्ष) से कम के हैं। कंपनियों को उन्नत तकनीक और मॉडरेशन टूल्स का उपयोग करके ऐसे अकाउंट्स को सक्रिय रूप से ट्रैक करना होगा। यह नीति कंपनियों को अधिक सतर्क और जिम्मेदार बनाने के लिए बनाई गई है।
हाई रिस्क कैटेगरी और वैश्विक उदाहरण
यह कड़े नियम मार्च 2026 में लागू किए गए थे, जिनका लक्ष्य उन प्लेटफॉर्म्स पर लगाम लगाना था जिन्हें सरकार ने ‘हाई रिस्क कैटेगरी’ में रखा है। इस श्रेणी के अंतर्गत यूट्यूब, टिकटॉक, इंस्टाग्राम, एक्स (X) और रोब्लॉक्स (Roblox) जैसे लोकप्रिय ऐप्स शामिल हैं, जो बच्चों के बीच सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं। इंडोनेशिया का यह साहसी कदम अब पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण बन गया है। अन्य देश, जो अपने बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इंडोनेशिया के इस ‘डिजिटल सेफ्टी मॉडल’ का अध्ययन कर रहे हैं। आने वाले समय में माना जा रहा है कि कई राष्ट्र इसी तर्ज पर कड़े कानून लाकर बच्चों को एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करने का प्रयास करेंगे।










