Manipur New CM
Manipur New CM: मणिपुर की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। इस निर्णय के साथ ही यह साफ हो गया है कि वे मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। खेमचंद सिंह, एन. बीरेन सिंह की कैबिनेट में एक प्रभावशाली मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2025 में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने से पहले तक, उनके पास नगरपालिका प्रशासन, आवास विकास (MAHUD), ग्रामीण विकास, पंचायती राज और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी।
युमनाम खेमचंद सिंह की गिनती मणिपुर के सबसे कद्दावर और अनुभवी नेताओं में होती है। उन्होंने इंफाल वेस्ट जिले की सिंगजामेई (Singjamei) विधानसभा सीट से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की है। वर्ष 2017 में पहली बार इस सीट से विधायक बनकर वे मणिपुर विधानसभा पहुँचे थे, जहाँ उन्हें विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनावों के बाद भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम सबसे आगे था, लेकिन उस समय एन. बीरेन सिंह बाजी मार ले गए थे। इस बार पार्टी आलाकमान ने उनके अनुभव और जमीनी पकड़ पर भरोसा जताया है।
खेमचंद सिंह की पहचान केवल एक कुशल राजनेता तक सीमित नहीं है। उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का अत्यंत करीबी माना जाता है, जिससे उनकी वैचारिक जड़ें काफी गहरी हैं। राजनीति में आने से पहले वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के ताइक्वांडो खिलाड़ी रह चुके हैं। खेल जगत में उनकी उपलब्धियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें ताइक्वांडो में ‘फिफ्थ-डैन ब्लैक बेल्ट’ से सम्मानित किया गया है। वे भारत के ऐसे पहले राजनेता हैं, जिन्होंने खेल के क्षेत्र में यह विशिष्ट उपलब्धि हासिल की है। उनका अनुशासन और जुझारू व्यक्तित्व उनके खेल करियर की ही देन माना जाता है।
मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के दौरान खेमचंद सिंह को कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। हिंसा भड़कने के बाद केंद्र सरकार ने उन्हें विशेष चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया था ताकि शांति बहाली के प्रयास तेज किए जा सकें। हालांकि, इस दौरान वे खुद भी हिंसा के शिकार हुए। अक्टूबर 2023 में उपद्रवियों ने सिंगजामेई स्थित उनके निजी आवास के गेट पर ग्रेनेड से हमला किया था। इस हमले में सीआरपीएफ (CRPF) का एक जवान और खेमचंद के एक रिश्तेदार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनता के बीच अपना विश्वास बनाए रखा।
मुख्यमंत्री के रूप में युमनाम खेमचंद सिंह के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। लंबे समय तक चले राष्ट्रपति शासन और जातीय संघर्ष के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। शिक्षा और ग्रामीण विकास विभाग संभालने के उनके अनुभव से उम्मीद की जा रही है कि वे राज्य के बुनियादी ढांचे और युवाओं के भविष्य को संवारने में सफल रहेंगे। भाजपा नेतृत्व ने उन्हें एक ऐसे समय में राज्य की बागडोर सौंपी है जब मणिपुर को एक स्थिर और समावेशी नेतृत्व की सख्त जरूरत है।
युमनाम खेमचंद सिंह का मुख्यमंत्री बनना राज्य की राजनीति में शक्ति संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और पूरे राज्य की निगाहें अब उनकी नई कैबिनेट और आगामी नीतियों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि एक ‘ब्लैक बेल्ट’ चैंपियन अपनी राजनीतिक कुशलता से मणिपुर के अशांत माहौल में शांति का ‘नया सवेरा’ कैसे लाता है।
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