Jubeen Garg music journey: जुबिन गर्ग का सफर, बचपन से लेकर पहला एल्बम तक की कहानी

Jubeen Garg music journey: असम फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने सिंगर जुबिन गर्ग का निधन ने उनके फैंस के दिलों को झकझोर कर रख दिया है। 52 साल के जुबिन हाल ही में सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में हिस्सा लेने गए थे, जहां स्कूबा डाइविंग के दौरान हुए हादसे में उनकी मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल जुबिन को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

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जुबिन गर्ग का प्रारंभिक जीवन और संगीत यात्रा

IMDB के अनुसार, जुबिन गर्ग का जन्म 18 नवंबर 1972 को मेघालय के तुरा में हुआ था। उन्होंने संगीत के प्रति लगाव बहुत कम उम्र में ही दिखाना शुरू कर दिया था। मात्र 3 साल की उम्र में उन्होंने गाना शुरू कर दिया था, और उनकी पहली गुरु उनकी मां थीं, जिन्होंने उन्हें गायकी की बुनियादी बातें सिखाईं। 11 साल की उम्र में उन्होंने पंडित रोबिन बनर्जी से संगीत की शिक्षा ली और गुरु रुमानी राय ने उन्हें असमीज फोक म्यूजिक से परिचित कराया।

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जुबिन ने अपने करियर की शुरुआत 13 साल की उम्र में की, जब उन्होंने अपना पहला गाना गाया और उसी उम्र में वह गाना कंपोज भी किया। 19 साल की उम्र में उनका पहला एल्बम ‘अनामिका’ (1992) आया। इसके बाद 1995 में जुबिन मुंबई आए और उन्होंने अपना पहला इंडिपॉप सोलो एल्बम ‘चांदनी रात’ रिलीज किया। 1990 के दशक में उनके एल्बम ‘जलवा’, ‘यूही कभी’, ‘जादू’ और ‘स्पर्श’ ने काफी लोकप्रियता हासिल की।

फिल्मी दुनिया में जुबिन गर्ग की पहचान

जुबिन गर्ग ने हिंदी फिल्मों में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। ‘गद्दार’, ‘दिल से’, ‘डोली सजा के रखना’, ‘फिजा’, ‘कांटे’ जैसी फिल्मों में उनके गाने लोगों के दिलों को छू गए। उनका सबसे बड़ा हिंदी हिट ‘या अली’ था, जो फिल्म ‘गैंगस्टर’ (2006) का गाना था। इसके लिए उन्हें ग्लोबल इंडियन फिल्म अवॉर्ड (GIFA) भी मिला। इसके बाद उन्होंने ‘जाने क्या चाहे मन बावरा’, ‘जीना क्या तेरे बिना’, ‘दिल तू ही बता’ और ‘दिल तो दीवाना है’ जैसे कई हिट बॉलीवुड गाने गाए।

बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में भी जुबिन गर्ग ने अपनी आवाज का जादू दिखाया और तीनों भाषाओं—असमीज, हिंदी और बंगाली—में उनका करियर सफल रहा।

जुबिन गर्ग की पर्सनल लाइफ और सामाजिक काम

2002 में जुबिन ने असम की फैशन डिजाइनर गरिमा साइकिया से शादी की। वे ‘द कलागुरू आर्टिस्ट फाउंडेशन’ नामक चैरिटी संस्था भी चलाते थे, जो जरूरतमंदों की मदद करती थी। इस फाउंडेशन ने असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री उपलब्ध कराई और कोविड महामारी के दौरान भी सक्रिय भूमिका निभाई।

सोशल मीडिया पर जुबिन गर्ग काफी लोकप्रिय थे और उनके 9 लाख से ज्यादा फॉलोअर थे। उनकी आवाज और संगीत ने लाखों दिलों को छुआ, और उनका योगदान भारतीय संगीत के लिए अमूल्य रहा।

जुबिन गर्ग का निधन संगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। 3 साल की उम्र से संगीत की दुनिया में कदम रखने वाले इस कलाकार ने न केवल असम बल्कि पूरे भारत में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके गाने और संगीत हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे। जुबिन गर्ग का संगीत सफर प्रेरणा का स्रोत है, जो कई नए कलाकारों के लिए मिसाल रहेगा।

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