Ambikapur News : सरगुजा संभाग में स्वास्थ्य विभाग के प्रभार वितरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्षेत्र के चिकित्सकों ने कमिश्नर सरगुजा संभाग को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया है कि जिला मलेरिया अधिकारी, नर्सिंग होम एक्ट तथा पीएनडीटी जैसे संवेदनशील और तकनीकी दायित्व एक लैब टेक्निशियन को नियम विरुद्ध तरीके से सौंपे गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि इस नियुक्ति ने न केवल वरिष्ठता सूची और योग्यता मानकों को दरकिनार किया है, बल्कि इससे गंभीर बीमारियों के नियंत्रण से जुड़ी सरकारी मशीनरी की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायत के अनुसार वर्ष 2018 में जारी एलटी वरिष्ठता सूची में राजेश गुप्ता 135वें स्थान पर हैं, जबकि उनसे वरिष्ठ करीब 25 लैब टेक्निशियन विभाग में पदस्थ हैं। इसके बावजूद वर्ष 2022 में जारी आदेश के आधार पर उन्हें लैब टेक्निशियन की योग्यता होने के बावजूद जिला मलेरिया अधिकारी का दायित्व सौंप दिया गया।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि राजेश गुप्ता पूर्व में लैब टेक्निशियन रहते हुए नियमित रूप से कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं रहते थे, फिर भी उन्हें वेतन मिलता रहा। साथ ही, पीसीपीएनडीटी, नर्सिंग होम एक्ट सहित कई कार्यक्रमों में नोडल अधिकारी बनकर वित्तीय अनियमितता करने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा स्वास्थ्य अमला जोखिम उठाकर जनता की सेवा में जुटा था, उस समय भी संबंधित कर्मचारी ने कोरोना जांच से दूरी बनाए रखी। आरोप है कि उस समय भी उसने अपनी पहुँच का उपयोग कर अपने मनमाफिक लोगों को लाभ दिलाया।
संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएँ, छत्तीसगढ़ ने 02 अगस्त 2023 को आदेश जारी कर राजेश गुप्ता को तत्काल मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने निर्देश दिया था। लेकिन शिकायत में कहा गया है कि जिला और संभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह आदेश लागू नहीं किया जा सका और वह अभी भी अधिकारी पद पर ही कार्यरत है।
सीएमएचओ द्वारा कार्यमुक्त करने के बाद भी उन्होंने विधिक शाखा के लिपिक की मदद से हाई कोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया।
शिकायत पत्र में यह भी प्रश्न उठाया गया है कि जहां ग्रामीण स्तर तक MBBS, BDS, BAMS और BHMS डॉक्टर पदस्थ हैं, वहीं MA योग्यता रखने वाले लैब टेक्निशियन को मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया और जेई जैसी वेक्टर जनित बीमारियों के नोडल अधिकारी का दायित्व क्यों दिया गया? चिकित्सकों के अनुसार यह निर्णय न केवल अव्यवहारिक है बल्कि चिकित्सा समुदाय में गहरी नाराज़गी का कारण भी बना हुआ है।
चिकित्सकों ने 2025 के हाई कोर्ट आदेश CGHC4992 का हवाला देते हुए कहा है कि अदालत ने सक्षम अधिकारी को इस मामले में उचित निर्णय लेकर स्थानांतरण करने की स्वतंत्रता प्रदान की है।
अंत में सरगुजा संभाग के चिकित्सकों ने कमिश्नर से मांग की है कि नियम विरुद्ध प्रभार तत्काल निरस्त किए जाएं, वरिष्ठता और योग्यता के अनुरूप प्रभार वितरण सुनिश्चित किया जाए और वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच कर कार्रवाई की जाए। जिस पर कमिश्नर ने फिलहाल जांच करा कार्यवाही का उचित आश्वसन दिया है।
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