Netanyahu Apology Qatar: दोहा हमले के 20 दिन बाद नेतन्याहू ने कतर से मांगी माफी, अमेरिका की अहम भूमिका

Netanyahu Apology Qatar: दोहा में 9 सितंबर को हुए इजराइली हवाई हमले के बाद उपजे तनाव को कम करने के लिए इजराइल ने आखिरकार कतर से आधिकारिक रूप से माफी मांग ली है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी को फोन कर हमले पर खेद जताया और कतर की संप्रभुता के उल्लंघन के लिए माफी मांगी। यह कॉल नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस से की, जहां वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक में थे।

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कतर पर हमले से बिगड़े रिश्ते

इजराइल ने दावा किया था कि दोहा में छिपे हमास के नेताओं को निशाना बनाने के लिए यह हमला किया गया था। हालांकि इस हमले में एक कतर सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई, जिससे कतर ने कड़ी आपत्ति जताई और इजराइल-हमास के बीच चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया था।

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कतर लंबे समय से इजराइल और हमास के बीच संघर्ष विराम, बंधकों की रिहाई और गाजा पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाता रहा है। लेकिन दोहा हमले के बाद कतर ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक उसकी संप्रभुता का सम्मान नहीं किया जाएगा, वह किसी भी मध्यस्थता में हिस्सा नहीं लेगा।

नेतन्याहू की माफी का क्या मतलब?

नेतन्याहू की यह माफी रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के बीच हाल ही में हुई बातचीत के बाद यह कूटनीतिक कदम उठाया गया है। माना जा रहा है कि अमेरिका ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई है, क्योंकि कतर में ही अमेरिका का सबसे बड़ा मिलिट्री बेस अल उदीद एयरबेस स्थित है, जहां करीब 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

शांति वार्ता में फिर सक्रिय होगा कतर?

नेतन्याहू की माफी के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि कतर फिर से शांति प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएगा। इससे गाजा में चल रहे युद्ध को रोकने, बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने और एक दीर्घकालिक समाधान की दिशा में प्रगति हो सकती है।

कतर के एक वरिष्ठ सलाहकार ने भी हाल ही में व्हाइट हाउस का दौरा किया था, जो इस बात का संकेत है कि कतर-अमेरिका के बीच लगातार संवाद बना हुआ है। कतर इस पूरे संघर्ष में एकमात्र ऐसा पक्ष है जो हमास और पश्चिमी देशों दोनों के साथ बातचीत कर सकता है।

इजराइल की यह माफी केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक आवश्यकता थी ताकि शांति की संभावनाएं जीवित रह सकें। कतर जैसे विश्वसनीय मध्यस्थ की वापसी से गाजा संघर्ष को खत्म करने की दिशा में नए रास्ते खुल सकते हैं। आने वाले दिनों में यदि कतर फिर से वार्ता प्रक्रिया में शामिल होता है, तो इससे इजराइल-हमास के बीच संघर्ष विराम की उम्मीद बढ़ेगी।

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