@TheTarget365 : पिछले दशक में देश में 270 मिलियन से अधिक लोग गरीबी से बाहर आ चुके हैं। विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है। बताया गया है कि 2011-12 में देश में 344.47 मिलियन लोग गरीबी रेखा से नीचे थे। 2022-23 में यह घटकर 75.24 मिलियन हो गयी। इसका मतलब यह है कि इस अवधि के दौरान देश में 269.23 मिलियन लोग गरीबी से बाहर आ गए हैं।
रिपोर्ट से पता चलता है कि 2011-12 में इन पांच राज्यों – उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश – के लोग कुल गरीबों का 65 प्रतिशत थे। 2022-23 में इसमें दो तिहाई की कमी आई है। इस रिपोर्ट को तैयार करते हुए विश्व बैंक ने 2021 के लिए अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा के रूप में प्रतिदिन 3 डॉलर निर्धारित किया है। यह देखा गया है कि गांवों में गरीबी रेखा से नीचे का प्रतिशत, जो पहले 18.4 प्रतिशत था, अब 2.8 प्रतिशत है। वहां, शहरी गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत पिछले 11 वर्षों में 10.7 प्रतिशत से घटकर मात्र 1.1 प्रतिशत रह गया है।
देश में गरीबी है या नहीं, इस बारे में दुष्प्रचार और प्रति-प्रचार सत्तारूढ़ दल और विपक्ष की निरंतर रणनीति है। यद्यपि हाल के भारत में चुनावी रणनीतियों के रूप में गरीबी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे महत्व खो रहे हैं, लेकिन धर्म तेजी से महत्वपूर्ण हो गया है। इसके बावजूद, लोकसभा चुनाव से तीन महीने पहले नीति आयोग ने दावा किया कि मोदी सरकार के दस साल में 249 मिलियन लोग गरीबी से बाहर आ गए हैं। मोदी ने इस बयान को लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
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