ADR Rreport 2025: भारत की 40 क्षेत्रीय पार्टियों ने वित्त वर्ष 2023-24 में कुल ₹2532.09 करोड़ की आय घोषित की है, जिसमें से 70.93% आय अकेले चुनावी बॉन्ड से प्राप्त हुई है। यह खुलासा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल घोषित आय में से ₹1796.02 करोड़ चुनावी बॉन्ड से आए हैं। सबसे ज्यादा कमाने वाली पार्टियां पार्टी आय (₹ करोड़ में) भारत राष्ट्र समिति (BRS) 685.51 तृणमूल कांग्रेस (TMC) 646.39 बीजू जनता दल (BJD) 297.81 तेलुगु देशम पार्टी (TDP) 285.07 वाईएसआर कांग्रेस पार्टी 191.04 इन पांच पार्टियों को कुल आय का 83.17% हिस्सा प्राप्त हुआ, जो बाकी 35 पार्टियों की तुलना में कहीं ज्यादा है। इनकम में 45% की जबरदस्त वृद्धि ADR रिपोर्ट के मुताबिक, 2022-23 में इन 40 पार्टियों की कुल इनकम ₹1,736.85 करोड़ थी, जो 2023-24 में 45.77% बढ़कर ₹2532.09 करोड़ हो गई। पिछले वर्ष सबसे ज्यादा आय TMC को ₹312.93 करोड़ की हुई थी, जो इस साल दोगुनी हो गई। खर्च और बचत का विश्लेषण 27 पार्टियों ने बताया कि उन्होंने अपनी आय का पूरा हिस्सा खर्च नहीं किया। BRS ने ₹430.60 करोड़, TMC ने ₹414.92 करोड़, BJD ने ₹253.79 करोड़ खर्च नहीं किए। 12 पार्टियों ने अपनी आय से अधिक खर्च किया। इनमें DMK, समाजवादी पार्टी, JDU और YSR कांग्रेस शामिल हैं। गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने कोई आय घोषित नहीं की, लेकिन ₹1.56 लाख का खर्च दिखाया। चुनावी बॉन्ड बना सबसे बड़ा फंडिंग स्रोत कुल घोषित आय में से ₹2,117.85 करोड़ (83.64%) स्वैच्छिक दान से आया, जिसमें से अकेले ₹1,796.02 करोड़ (70.93%) चुनावी बॉन्ड से प्राप्त हुआ। इन चुनावी बॉन्ड्स का लाभ सिर्फ 10 क्षेत्रीय दलों को मिला, जिनमें BRS, TMC, BJD, TDP, YSR कांग्रेस और DMK प्रमुख हैं। SBI के आंकड़ों से खुलासा ADR द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने बताया कि: वर्ष 2023-24 में ₹4,507.56 करोड़ के चुनावी बॉन्ड राजनीतिक दलों ने भुनाए। राष्ट्रीय दलों को मिले: ₹2,524.14 करोड़ (55.99%) क्षेत्रीय दलों को मिले: ₹1,796.02 करोड़ (39.84%) रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भाजपा, कांग्रेस और आप ही ऐसी राष्ट्रीय पार्टियां थीं, जिन्हें चुनावी बॉन्ड के जरिए चंदा प्राप्त हुआ। ADR की यह रिपोर्ट भारतीय राजनीति में पारदर्शिता, फंडिंग और खर्च को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। जहां एक ओर कुछ क्षेत्रीय दलों को भारी मात्रा में चुनावी फंडिंग मिल रही है, वहीं आय से अधिक खर्च करने वाले दलों की संख्या भी कम नहीं। चुनावी बॉन्ड के जरिये फंडिंग का बड़ा हिस्सा अब क्षेत्रीय दलों तक पहुंच रहा है, जिससे यह साफ है कि राजनीतिक फाइनेंसिंग का समीकरण तेजी से बदल रहा है। Read More :Nepal Protest: Nepal संकट के बीच Sushila Karki सत्ता संभालने को तैयार, Gen-Z आंदोलनकारियों का मिल रहा समर्थन














