Ambikapur News: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पदस्थ एक ट्रेनी आईपीएस अधिकारी के खिलाफ रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों को लेकर दिल्ली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में परिवाद दायर किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अधिकारी ने एक आपराधिक मामले की जांच के दौरान एक करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की थी। परिवाद में यह भी दावा किया गया है कि कथित रिश्वत की राशि हवाला नेटवर्क के माध्यम से संबंधित अधिकारी तक पहुंचाई गई। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और सीबीआई निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की है। फिलहाल मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

ठगी के मामले की जांच के दौरान रिश्वत मांगने का आरोप
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरियाणा निवासी आकाश कुमार के खिलाफ अंबिकापुर साइबर रेंज थाने में कथित ठगी का एक मामला दर्ज है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी प्रकरण की जांच के दौरान उस समय अंबिकापुर में सीएसपी के रूप में पदस्थ ट्रेनी आईपीएस अधिकारी राहुल बंसल ने उनसे एक करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मांग जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और आरोपों की सत्यता की जांच अभी शेष है।

हवाला नेटवर्क के जरिए रकम पहुंचाने का दावा
शिकायतकर्ता ने अपने परिवाद में आरोप लगाया है कि कथित रिश्वत की राशि सीधे नहीं, बल्कि हवाला नेटवर्क के माध्यम से पहुंचाई गई। परिवाद में यह भी कहा गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा ने कथित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाई। शिकायतकर्ता ने अपने दावों के समर्थन में अदालत के समक्ष कुछ डिजिटल साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं। इनमें व्हाट्सऐप चैट, ऑडियो क्लिप और अन्य दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। हालांकि इन साक्ष्यों की प्रमाणिकता की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद ही हो सकेगी।
पहले भी सीबीआई से की थी शिकायत
शिकायतकर्ता आकाश कुमार का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत पहले सीबीआई निदेशक को भी भेजी थी। उनके अनुसार, उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाते हुए दिल्ली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत में दायर परिवाद में उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग
परिवाद में ट्रेनी आईपीएस अधिकारी राहुल बंसल, एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 7ए के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल अदालत ने इस संबंध में किसी भी आरोप को सिद्ध नहीं माना है और मामला विचाराधीन है।

अदालत ने डीजीपी और सीबीआई निदेशक से मांगा जवाब
बताया गया है कि विशेष अदालत ने इससे पहले 17 जुलाई को छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक से इस मामले में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। अदालत में डीजीपी की ओर से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया, लेकिन न्यायालय ने यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया और निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही सीबीआई निदेशक से भी मामले पर जवाब मांगा गया है। अदालत अब दोनों पक्षों से प्राप्त रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर आगे की सुनवाई करेगी।
11 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की गई है। फिलहाल ट्रेनी आईपीएस अधिकारी पर लगाए गए आरोपों को लेकर पुलिस महकमे और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का माहौल है। हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अभी तक अदालत ने किसी भी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया है। मामले की सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित जांच एजेंसियों की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में सभी आरोप फिलहाल न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
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