Love jihad UP: उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पिछले एक महीने में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से 56 लड़कियों के अपहरण की खबर ने प्रशासन और आम लोगों को सकते में डाल दिया है। इन मामलों में 40 लड़कियां नाबालिग हैं, और बड़ी संख्या में दलित और गरीब परिवारों से ताल्लुक रखती हैं।

पुलिस ने 49 लड़कियों को किया बरामद
जिले में अपहरण की बढ़ती घटनाओं पर पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने जानकारी दी कि अब तक दर्ज 56 एफआईआर में से 49 लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामलों में प्रेम-प्रसंग की बात सामने आई है, और सबूतों के आधार पर संबंधित युवकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

दलित और गरीब परिवारों की बेटियां अधिक प्रभावित
जिन लड़कियों का अपहरण हुआ है, उनमें अधिकांश दलित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आती हैं। पुलिस की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दो लड़कियां मुस्लिम समुदाय की हैं, जबकि अपहरण के आरोपियों में तीन युवक मुस्लिम समुदाय के पाए गए हैं।
लव जिहाद का आरोप, विश्व हिंदू परिषद ने जताई चिंता
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अवध प्रांत प्रमुख अरविंद पांडे ने आरोप लगाया कि जिले में “लव जिहाद” के नाम पर सुनियोजित तरीके से लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इन मामलों की गहन जांच की जाए और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई हो।
कानून व्यवस्था पर सवाल, प्रशासन में हड़कंप
लगातार बढ़ते अपहरण के मामलों ने जिला प्रशासन और पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई लड़कियों को सकुशल वापस लाने में सफलता पाई है, लेकिन अब भी 7 लड़कियों का सुराग नहीं मिल पाया है।
इस घटनाक्रम के चलते स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश है। सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने अधिक सुरक्षा उपायों और निगरानी की मांग की है, खासकर स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों के लिए।
प्रशासन ने दिए सुरक्षा समीक्षा के निर्देश
घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जिला स्तर पर विशेष जांच टीमों (SIT) के गठन और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी निगरानी को मजबूत करने की योजना भी बनाई जा रही है।
अंबेडकरनगर में लड़कियों के अपहरण की बढ़ती घटनाएं सिर्फ कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। जबकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन इस तरह की घटनाओं की जड़ तक जाकर स्थायी समाधान निकालना बेहद जरूरी है।










