Health Checkup : 30 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव धीरे-धीरे होने लगते हैं। इनमें से कुछ बदलाव स्पष्ट लक्षणों के रूप में सामने नहीं आते। ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, थायरॉइड या हीमोग्लोबिन में असामान्यता लंबे समय तक बिना किसी खास संकेत के रह सकती है। इसलिए उम्र बढ़ने के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, हर महिला को सभी टेस्ट हर साल कराने की आवश्यकता नहीं होती। जांच की जरूरत उम्र, पारिवारिक इतिहास, वजन, मासिक धर्म, गर्भावस्था और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर तय होती है।
HbA1c और फास्टिंग ब्लड शुगर की जांच
डायबिटीज शुरुआती दौर में कई बार बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकती है। HbA1c टेस्ट पिछले करीब दो से तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर स्तर का संकेत देता है, जबकि फास्टिंग ब्लड शुगर जांच खाली पेट ग्लूकोज का स्तर बताती है। 2026 के American Diabetes Association Standards के अनुसार सामान्य जोखिम वाली महिलाओं में डायबिटीज स्क्रीनिंग 35 वर्ष की उम्र से शुरू करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, अधिक वजन, परिवार में डायबिटीज का इतिहास, PCOS, हाई ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज होने पर इससे पहले भी जांच जरूरी हो सकती है।
लिपिड प्रोफाइल से जानें कोलेस्ट्रॉल का स्तर
लिपिड प्रोफाइल में LDL, HDL, ट्राइग्लिसराइड और कुल कोलेस्ट्रॉल की जांच की जाती है। बढ़ा हुआ LDL कोलेस्ट्रॉल आमतौर पर शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देता, लेकिन लंबे समय तक धमनियों में प्लाक जमा होने का कारण बन सकता है। इससे हृदय रोग, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर डॉक्टर लिपिड प्रोफाइल कराने की सलाह दे सकते हैं। WHO के अनुसार, वर्ष 2023 में बढ़ा हुआ LDL वैश्विक स्तर पर अनुमानित 36 लाख मौतों से जुड़ा था।
CBC और हीमोग्लोबिन टेस्ट भी है महत्वपूर्ण
महिलाओं में आयरन की कमी और एनीमिया आम स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हो सकते हैं। खासतौर पर अधिक मासिक रक्तस्राव वाली महिलाओं में इसका जोखिम बढ़ सकता है। CBC टेस्ट हीमोग्लोबिन के साथ रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स की स्थिति की जानकारी देता है। लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर या सांस फूलने जैसी शिकायत होने पर डॉक्टर इस जांच की सलाह दे सकते हैं। एनीमिया की स्थिति में फेरिटिन और आयरन प्रोफाइल जैसी अतिरिक्त जांच भी जरूरी हो सकती है।
TSH से थायरॉइड की स्थिति का पता चलता है
थायरॉइड हार्मोन में असंतुलन महिलाओं के वजन, ऊर्जा, नींद, मासिक धर्म और प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, केवल उम्र के आधार पर हर महिला के लिए सालाना TSH टेस्ट जरूरी नहीं माना जाता। लेकिन परिवार में थायरॉइड बीमारी का इतिहास, मासिक धर्म में बदलाव, अचानक वजन बढ़ना या घटना, अत्यधिक थकान अथवा गर्भधारण की स्थिति में डॉक्टर इस जांच की सलाह दे सकते हैं।
किडनी फंक्शन टेस्ट से पता चलती है कार्यक्षमता
किडनी फंक्शन टेस्ट में क्रिएटिनिन और eGFR जैसी जांचें किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने में मदद करती हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी से जुड़ी बीमारी या लंबे समय तक कुछ दवाओं का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में इन जांचों की जरूरत अधिक हो सकती है। किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में कई बार बिना स्पष्ट लक्षण के रहती है, इसलिए जोखिम वाले लोगों में समय पर जांच महत्वपूर्ण है।
लिवर फंक्शन टेस्ट कब हो सकता है जरूरी
लिवर की स्थिति का प्रारंभिक आकलन करने के लिए ALT, AST, बिलिरुबिन सहित कई मापदंडों की जांच की जाती है। मोटापा, डायबिटीज, बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड, शराब का सेवन या कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल लिवर संबंधी समस्याओं के जोखिम को प्रभावित कर सकता है। ऐसी परिस्थितियों में डॉक्टर LFT के साथ जरूरत के अनुसार आगे की जांच भी सुझा सकते हैं। किसी भी टेस्ट की जरूरत व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह के आधार पर तय करना बेहतर है।
Read More : MCB News: कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने लिया देहदान का संकल्प, मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा