इटली के मिलान में हिंसक प्रदर्शन और लूटपाट के बाद सरकार ने 500 सैनिक तैनात करने का फैसला किया है। पुलिस ने 271 युवाओं को हिरासत में लेने की जानकारी दी है। महंगे बाजारों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। अब सवाल है कि क्या नए कदम शहर में हिंसा रोक पाएंगे?
इटली के मिलान में हिंसक प्रदर्शन और लूटपाट के बाद सरकार ने 500 सैनिक तैनात करने का फैसला किया है। पुलिस ने 271 युवाओं को हिरासत में लेने की जानकारी दी है। महंगे बाजारों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। अब सवाल है कि क्या नए कदम शहर में हिंसा रोक पाएंगे?

Italy Milan Protest : इटली के मिलान शहर में दो दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन, हिंसक झड़पों और दुकानों में लूटपाट के बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है। शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए जाएंगे। सोमवार को देश के उपप्रधानमंत्री मत्तेओ साल्विनी ने इसकी घोषणा की। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन को आशंका है कि शहर में दोबारा हिंसा फैल सकती है। इसी कारण प्रमुख इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा रही है और दुकानदारों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मिलान में बिगड़ते हालात को देखते हुए सरकार विशेष सुरक्षा उपाय लागू करने की तैयारी कर रही है। मंगलवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में एक विशेष सुरक्षा पैकेज को मंजूरी दिए जाने की संभावना है। उपप्रधानमंत्री मत्तेओ साल्विनी ने सोशल मीडिया पर मिलान की सुरक्षा के लिए 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की बात कही। प्रशासन का उद्देश्य शहर में शांति बहाल करना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाना और संभावित हिंसक घटनाओं पर नियंत्रण रखना है। एहतियात के तौर पर शहर के केंद्र में कई दुकानों को सामान्य समय से पहले बंद कर दिया गया।

हिंसा और लूटपाट की आशंका के बीच मिलान के प्रसिद्ध लग्जरी शॉपिंग क्षेत्र विया मोंतेनापोलियोने में दुकानदारों ने विशेष सावधानी बरतनी शुरू कर दी है। कई दुकानों के डिस्प्ले से महंगे उत्पाद हटा दिए गए हैं, ताकि संभावित लूटपाट के दौरान नुकसान कम किया जा सके। पुलिस ने इस इलाके में गश्त भी बढ़ा दी है। चैनल, टिफनी और डायर जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों के स्टोर में भी सुरक्षा संबंधी एहतियाती कदम उठाए गए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में किसी नई घटना को रोका जा सके।
मिलान में हालिया हिंसा के दौरान डेकाथलॉन, आर्कटेरिक्स और वोडाफोन जैसे संस्थानों के स्टोर लूटपाट की घटनाओं से प्रभावित हुए। टेलीविजन फुटेज में दुकानों में तोड़फोड़ और सामान लूटे जाने के दृश्य दिखाई दिए। नई घटनाओं की आशंका को देखते हुए लेवीज, अंडर आर्मर और डेकाथलॉन जैसे ब्रांडों की दुकानों की खिड़कियों को कार्डबोर्ड और लकड़ी के पैनलों से ढक दिया गया। कारोबारियों को डर है कि यदि हालात दोबारा बिगड़े तो दुकानों और महंगे सामान को नुकसान पहुंच सकता है।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और लूटपाट की आलोचना की है। सोमवार को उन्होंने मंत्रियों और सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की। सरकार सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और हिंसक गतिविधियों को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पर विचार कर रही है। इटली में अगले वर्ष राष्ट्रीय चुनाव होने हैं, ऐसे में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इटली के विदेश मंत्री और उपप्रधानमंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि राज्य और सार्वजनिक व्यवस्था पर हुए हमलों का सरकार कड़ा जवाब देगी। उन्होंने नाबालिगों की कथित संलिप्तता वाली हिंसक घटनाओं पर भी सख्त कदम उठाने की बात कही। इतालवी अखबार कोरिएरे डेला सेरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार नाबालिगों की निवारक हिरासत की अवधि बढ़ाने और किशोर गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई कड़ी करने पर विचार कर रही है। संसद में विचाराधीन सुरक्षा विधेयक के कुछ प्रावधानों को जल्द लागू करने की संभावना भी देखी जा रही है।
पुलिस के अनुसार, रविवार को मिलान में हुई अशांति के सिलसिले में 271 युवाओं को हिरासत में लिया गया। सोमवार को पुलिस ने बताया कि इनमें से 32 लोगों को गिरफ्तार किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों में 23 नाबालिग और 13 विदेशी नागरिक शामिल बताए गए हैं। इसके अतिरिक्त 28 लोगों के संबंध में न्यायिक अधिकारियों को सूचना दी गई। हालांकि, हिरासत और गिरफ्तारी अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं, इसलिए इन आंकड़ों को उसी संदर्भ में समझना जरूरी है।
पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को मिलान के अलावा बोलोन्या, ब्रेशिया, बर्गामो और ट्यूरिन सहित उत्तरी इटली के कई शहरों में भी झड़पें हुई थीं। इन घटनाओं के बाद तनाव बढ़ गया। शनिवार की हिंसा के सिलसिले में 28 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी दी गई। विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को लेकर नाराजगी से हुई थी। बाद में कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए और दुकानों को निशाना बनाया गया।
रिपोर्ट में इटली की अशांति को फ्रांस में हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों के व्यापक संदर्भ से भी जोड़ा गया है। फ्रांस में महंगाई और सरकारी सेवाओं की स्थिति को लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे थे। इटली में भी जीवन-यापन की लागत और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष प्रदर्शन का प्रमुख कारण बताया गया है। फिलहाल मिलान में सरकार की प्राथमिकता सुरक्षा बहाल करना और दोबारा हिंसा फैलने से रोकना है।
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