UP Election 2027 : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच चंदौली जिले में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के भीतर नाराजगी का मामला सामने आया है। पार्टी प्रमुख और प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर से असंतुष्ट कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा देने का ऐलान किया है। नाराज नेताओं ने संगठन की कार्यप्रणाली, पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी और आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप, नेतृत्व पर उठाए सवाल
सुभासपा के वाराणसी मंडल युवा मोर्चा के प्रमुख महासचिव दीपक राजभर ने पार्टी नेतृत्व पर अपने मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिन कार्यकर्ताओं ने पिछले 20 से 24 वर्षों तक संगठन को मजबूत करने के लिए मेहनत की, उन्हें आज उचित सम्मान और महत्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज के विकास के बजाय नेतृत्व के निजी विकास पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, ये आरोप नाराज पदाधिकारियों की ओर से लगाए गए हैं।
बबलू राजभर ने उठाए बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे
पार्टी छोड़ने का ऐलान करने वालों में युवा मंडल अध्यक्ष एवं मंत्री प्रतिनिधि बबलू राजभर भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राजभर समाज के समर्थन से राजनीतिक पहचान बनाने वाले नेताओं के बावजूद समाज के कई लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं। उनके मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में आवास, नाली, खड़ंजा और सड़क जैसी समस्याओं के समाधान के लिए कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इसे समाज के हितों की अनदेखी से जोड़ते हुए नेतृत्व के प्रति नाराजगी जताई।
अंबेडकर नगर में बैठक के बाद भी नहीं हुई बातचीत
बबलू राजभर ने दावा किया कि संगठन की कमजोर स्थिति और उसमें सुधार की जरूरत को लेकर 16 तारीख को अंबेडकर नगर में ओमप्रकाश राजभर के सामने मुद्दे उठाए गए थे। पदाधिकारियों ने संगठन को मजबूत बनाने और कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत बताई थी। हालांकि, उनके अनुसार, इस चर्चा के बाद भी नेतृत्व की ओर से उनसे संपर्क नहीं किया गया। नाराज नेताओं का कहना है कि लगातार अनदेखी के कारण उन्हें पार्टी छोड़ने जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
2027 के टिकट वितरण पर भी उठे सवाल
दीपक राजभर ने आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भी आशंका जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजभर समाज के वोटों का इस्तेमाल तो किया जाता है, लेकिन चुनाव लड़ने का अवसर देने में समाज के लोगों को प्राथमिकता नहीं मिलती। उन्होंने 2022 के सपा-सुभासपा गठबंधन का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि उस समय पार्टी को मिली 16 सीटों पर कितने राजभर समाज के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया गया था। उन्होंने टिकट वितरण में कथित सौदेबाजी और बाहुबलियों को उम्मीदवार बनाए जाने की आशंका भी जताई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस्तीफा देने वालों ने सम्मान और हिस्सेदारी को बनाया मुद्दा
नाराज पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक चंदा जुटाने, गांव-गांव जाकर प्रचार करने और संगठन का विस्तार करने में योगदान दिया, लेकिन अब उन्हें उचित महत्व नहीं मिलता। उनका कहना है कि राजभर समाज अब अपने हक, राजनीतिक हिस्सेदारी और सम्मान को ध्यान में रखकर फैसले करेगा। नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ सकते हैं।
ओमप्रकाश राजभर की प्रतिक्रिया का इंतजार
सुभासपा में सामने आई इस नाराजगी ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की चुनौतियों को उजागर किया है। हालांकि, फिलहाल इन आरोपों पर ओमप्रकाश राजभर या पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को मनाने और संगठन में एकजुटता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है।