Save Democracy Day : वरिष्ठ वकील और राजनीतिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने 23 अक्टूबर को ‘लोकतंत्र बचाओ दिवस’ के रूप में मनाने की अपील की है। उन्होंने देशवासियों से शुक्रवार को अपने-अपने मोहल्लों, गलियों और शहरों में शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दे उठाने का आह्वान किया। भूषण के मुताबिक, यह पहल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के उद्देश्य से की जा रही है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने का दावा
प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि पहले लोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन सरकार ने दिल्ली में सख्त पाबंदियां लगा दीं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि जब राजधानी में प्रदर्शन के लिए जगह नहीं मिलती, तो देश के अलग-अलग हिस्सों में नागरिकों को अपनी आवाज उठानी चाहिए। हालांकि, दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को संबंधित अधिकारियों के बयानों के साथ देखा जाना चाहिए।
‘हर गली और हर शहर को बनाएं जंतर-मंतर’
भूषण ने अपने संदेश में कहा कि लोकतंत्र से जुड़े सवालों को उठाने के लिए देशभर में नागरिकों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने मोहल्लों, गलियों और शहरों में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होकर लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करें। उनका संदेश था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और विरोध देश के अन्य हिस्सों में भी किया जा सकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और ‘वोट चोरी’ का मुद्दा
प्रस्तावित प्रदर्शन का एक प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और मतदाता सूचियों से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोप हैं। प्रदर्शन से जुड़े कार्यकर्ता चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। ये आयोजकों के आरोप और मांगें हैं; इन्हें स्थापित तथ्य मानने से पहले संबंधित आधिकारिक जानकारी और स्वतंत्र रिपोर्टों की जांच जरूरी है।
अभिजीत दिपके, नेहा बोरा और अन्य नेताओं को आमंत्रण
इस मार्च में शामिल होने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके, आइसा प्रमुख नेहा बोरा, अभिनेता प्रकाश राज और किसान नेता राकेश टिकैत सहित अन्य विपक्षी नेताओं को आमंत्रित किए जाने की जानकारी दी गई है। अभिजीत दिपके और नेहा बोरा पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन से जुड़े रहे हैं। हालांकि, आमंत्रण मिलने और किसी नेता की वास्तव में मार्च में भागीदारी की पुष्टि अलग-अलग विषय हैं। सभी आमंत्रित व्यक्तियों की उपस्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
पालमपुर में भी मार्च निकालने की घोषणा
प्रशांत भूषण ने इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में भी मार्च निकालने की बात कही थी। उनके मुताबिक, वहां 23 अक्टूबर को सुबह 11 बजे मार्च आयोजित करने की योजना है। इस तरह ‘लोकतंत्र बचाओ दिवस’ के तहत अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया गया है। स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम के आयोजन, अनुमति और भागीदारी से जुड़ी जानकारी संबंधित आयोजकों से प्राप्त की जा सकती है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन और लोकतांत्रिक अधिकारों पर जोर
प्रशांत भूषण की अपील का केंद्र नागरिकों की भागीदारी, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवाल हैं। प्रस्तावित मार्च के जरिए आयोजक मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सार्वजनिक करना चाहते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में शांतिपूर्ण भागीदारी, स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन और दावों की तथ्यात्मक जांच महत्वपूर्ण रहती है। 23 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रमों का वास्तविक स्वरूप और उनमें लोगों की भागीदारी संबंधित स्थानों से मिलने वाली पुष्ट जानकारी के आधार पर स्पष्ट होगी।
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