Temple Marriage Legal Case : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह की वैधता और शादी की रस्मों से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल विवाह की रस्मों को लेकर विवाद होने के आधार पर किसी शादी को अमान्य घोषित नहीं किया जा सकता। एक पति ने अदालत में याचिका दायर कर दावा किया था कि मंदिर में शादी के दौरान सात फेरे पूरे नहीं हुए थे, इसलिए विवाह को शून्य घोषित किया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की पीठ ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की खंडपीठ ने की। अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि विवाह को शून्य घोषित करने के लिए कानून में निर्धारित आधारों को देखना जरूरी है। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत विवाह को अमान्य घोषित करने के लिए यह जांचना आवश्यक है कि संबंधित विवाह में धारा 5 की शर्तों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। केवल रस्मों को लेकर मतभेद होना अपने आप में विवाह को शून्य घोषित करने का पर्याप्त आधार नहीं है।
फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट ने किया रद्द
हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने मामले के कानूनी पहलुओं पर उचित ध्यान देने के बजाय विवाह की रस्मों और उसकी वैधता पर फैसला दिया था। अदालत के अनुसार, इस तरह के मामले में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि विवाह के दौरान कौन-सी रस्म पूरी हुई या नहीं हुई। इसके बजाय कानून में निर्धारित शर्तों और विवाह को अमान्य घोषित करने के आधारों की जांच जरूरी है। इसी कानूनी त्रुटि के कारण हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया।
पति को नहीं मिली शादी अमान्य घोषित कराने की राहत
फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द होने के बावजूद याचिकाकर्ता पति को वह राहत नहीं मिली, जिसकी उसने मांग की थी। हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इस फैसले में अदालत ने विवाह की वैधता से जुड़े विवादों पर कानूनी प्रावधानों के अनुरूप विचार करने की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि हर परिस्थिति में सात फेरों के बिना हुआ विवाह स्वतः वैध माना जाएगा। विवाह की वैधता संबंधित तथ्यों, लागू कानून और आवश्यक रस्मों पर निर्भर कर सकती है।
सोशल मीडिया पर दोस्ती के बाद मंदिर में हुई थी शादी
यह मामला छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में रहने वाले एक युवक और युवती से जुड़ा है। दोनों की दोस्ती सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। इसके बाद उन्होंने 3 फरवरी 2022 को मंदिर में शादी की। शादी के कुछ दिनों बाद दोनों के बीच मनमुटाव शुरू हो गया और रिश्ते में विवाद बढ़ने लगा।
पति ने सात फेरे पूरे नहीं होने का किया था दावा
विवाद बढ़ने के बाद युवक ने विवाह को मानने से इनकार कर दिया। उसका दावा था कि शादी के समय सात फेरे पूरे नहीं हुए थे और विवाह से संबंधित दस्तावेजों पर दबाव डालकर हस्ताक्षर कराए गए थे। दूसरी ओर, पत्नी का कहना था कि दोनों का विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ था। इसी विवाद ने कानूनी रूप ले लिया और मामला अदालत तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने मामले में कानूनी प्रावधानों को आधार बनाकर पति की याचिका खारिज कर दी।
Read More : Chhattisgarh Hockey League : छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में न्यायधानी नाइट्स की जीत, महिला मुकाबले में इंद्रावती टाइग्रेस ने बाजी मारी