Haryana Electricity Strike : हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) के फैसले के विरोध में बिजली कर्मचारी तीन दिन की हड़ताल पर चले गए हैं। इस बीच राज्य के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी। ऐसे में कर्मचारियों को हड़ताल करने के बजाय सरकार के साथ मिलकर अदालत में मामले की पैरवी करनी चाहिए।
HERC के फैसले के खिलाफ अपील करेगी सरकार
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार आयोग के फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। सरकार अपीलिएट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) का दरवाजा खटखटाएगी और बिजली वितरण के लाइसेंस पर रोक लगाने के लिए स्टे ऑर्डर हासिल करने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक भी ले जाया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य कानूनी प्रक्रिया के जरिए फैसले को चुनौती देना है।
गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को लाइसेंस का विरोध
बिजली कर्मचारियों की नाराजगी की मुख्य वजह गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस देने का फैसला है। HERC के इस निर्णय के खिलाफ कर्मचारी संगठनों ने तीन दिवसीय हड़ताल शुरू की है। कर्मचारियों का विरोध बिजली वितरण व्यवस्था में निजी क्षेत्र की भागीदारी को लेकर है। हड़ताल के पहले दिन गुरुवार, 22 अक्टूबर को प्रदेश के कई स्थानों पर बिजली सेवाओं से संबंधित परेशानियों की खबरें सामने आईं। इससे आम उपभोक्ताओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
सरकार पहले ही नियुक्त कर चुकी है वकील
अनिल विज के मुताबिक, बिजली वितरण का लाइसेंस देने की प्रक्रिया केंद्रीय कानून के तहत गठित नियामक आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है। राज्य सरकार ने HERC के फैसले का विरोध किया था और मामले में कानूनी पक्ष रखने के लिए वकील भी नियुक्त किए थे। इसके बावजूद आयोग का निर्णय सरकार के पक्ष में नहीं आया। मंत्री ने बताया कि फैसला आने के लगभग आधे घंटे के भीतर ही सरकार ने इसके खिलाफ अपील करने का निर्णय ले लिया था।
कर्मचारियों से कानूनी लड़ाई में सहयोग की मांग
ऊर्जा मंत्री ने बिजली कर्मचारी यूनियनों से अपील की कि वे हड़ताल के बजाय कानूनी कार्रवाई में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने वकीलों के माध्यम से या सरकार की कानूनी टीम के साथ मिलकर मामले की तैयारी में योगदान दे सकते हैं। विज के अनुसार, सरकार इस मुद्दे को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। इसलिए कर्मचारियों को आंदोलन जारी रखने के बजाय बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए।
त्योहारों में बिजली आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती
अनिल विज ने कहा कि त्योहारों के मौसम में बिजली सेवाओं में बाधा आने से आम लोगों को परेशानी हो सकती है। इसी वजह से उन्होंने कर्मचारियों से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की। मंत्री ने यह भी बताया कि बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आसपास के राज्यों से कर्मचारियों की सहायता मांगी जा रही है। सरकार के सामने हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
दोपहर तीन बजे बैठक, फैसले पर टिकी नजरें
सरकार और बिजली कर्मचारी यूनियनों के बीच बातचीत के लिए दोपहर तीन बजे बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में हड़ताल समाप्त करने और निजीकरण से जुड़े विवाद पर चर्चा होने की उम्मीद है। हालांकि, फिलहाल हड़ताल खत्म होने को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। अब सभी की नजरें बैठक के नतीजे पर टिकी हैं। बातचीत से सहमति बनती है या कर्मचारी आंदोलन जारी रखते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
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