India China Border Dispute : कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार चीन के सामने रियायतें दे रही है। उन्होंने भारत-चीन सीमा पर तनाव, व्यापार घाटे और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाया। रमेश के मुताबिक, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ हालिया आमने-सामने की घटनाओं में बल के प्रदर्शन की सराहना की है, लेकिन प्रधानमंत्री और उनकी सरकार की ओर से इस विषय पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अरुणाचल प्रदेश में सीमा तनाव और गश्त पर सवाल
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि चीन के प्रति केंद्र सरकार की रियायतें लगातार जारी हैं। उन्होंने पिछले महीने तवांग क्षेत्र के तक्सिंग में हुई कथित आमने-सामने की घटना का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इसके बाद अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी। रमेश ने स्थानीय लोगों के हवाले से दावा किया कि कुछ गश्ती बिंदुओं पर भारत की स्थिति कमजोर हुई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
चीन के नामकरण और बांध परियोजना पर चिंता
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि चीन अरुणाचल प्रदेश के भारतीय क्षेत्रों के नाम बदलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चीन की ओर से लगभग 60,000 मेगावाट क्षमता की बताई जा रही बांध परियोजना पर भी चिंता जताई। रमेश के मुताबिक, इस तरह की परियोजना भारत की पारिस्थितिकी, नदियों के प्रवाह और जल सुरक्षा पर असर डाल सकती है। उन्होंने इन मुद्दों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की।
भारत-चीन व्यापार घाटे को बताया आर्थिक सुरक्षा का खतरा
जयराम रमेश ने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार घाटे को भी चिंता का विषय बताया। उनके दावे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर हो गया, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 99 अरब डॉलर था। उन्होंने कहा कि चीन से आयात पर निर्भरता बढ़ने से भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर दबाव पड़ रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए।
गलवान संघर्ष के बाद प्रधानमंत्री के बयान का जिक्र
कांग्रेस नेता ने 19 जून 2020 को गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला दिया। उस संघर्ष में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। रमेश ने प्रधानमंत्री के उस कथन को उद्धृत किया, जिसमें कहा गया था कि भारतीय सीमा में कोई घुसपैठ नहीं हुई और किसी चौकी पर दूसरे पक्ष का कब्जा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बयान ने चीन के प्रति सरकार की नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए।
पूर्व सेना प्रमुख और ऑपरेशन सिंदूर का मुद्दा
जयराम रमेश ने लद्दाख सीमा विवाद के संदर्भ में पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे से जुड़ी चर्चाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कथित निर्देश ‘जो उचित समझो, वो करो’ का जिक्र करते हुए सरकार की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इसके अलावा, उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के सैन्य अभियान के दौरान चीन की भूमिका को लेकर उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के 2025 में दिए गए बयान का हवाला दिया। रमेश ने बाद में जनरल अनिल चौहान की टिप्पणियों को लेकर भी सवाल उठाए। इन सभी दावों और बयानों की पुष्टि संबंधित मूल स्रोतों से किया जाना जरूरी है।
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