Uniform Civil Code : राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। अमित शाह के उस बयान के बाद सियासी बहस तेज हो गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2029 से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। मनोज झा ने इस मुद्दे को ‘डॉग व्हिसलिंग’ बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार इसके जरिए खास वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है।

‘जरूरी मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश’
मनोज झा ने कहा कि देश के सामने कई ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर सरकार को प्राथमिकता के साथ ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक बेरोजगारी, आय में असमानता और युवाओं से जुड़े सवाल ज्यादा गंभीर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय सरकार UCC जैसे विषयों को आगे लाकर जनता का ध्यान वास्तविक समस्याओं से हटाने की कोशिश कर रही है।

मोहन भागवत के बयान का भी किया जिक्र
RJD सांसद ने अपनी बात रखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के विदेश दौरे के दौरान दिए गए कथित बयान का भी उल्लेख किया। मनोज झा ने कहा कि भागवत ने अमेरिका या इंग्लैंड में एकता और एकरूपता को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा कि देश की एकता के लिए हर क्षेत्र और समुदाय में एक जैसी व्यवस्था होना जरूरी नहीं है। झा ने कहा कि इस पहलू पर भी विचार किया जाना चाहिए।
संविधान सभा की बहस का दिया हवाला
मनोज झा ने UCC के संवैधानिक पहलू का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संविधान सभा में अनुच्छेद 44 को लेकर हुई बहस से परिचित होंगे। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का विषय संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल है और इस पर लंबे समय से बहस होती रही है। झा ने लॉ कमीशन की रिपोर्ट और उससे जुड़े विचार-विमर्श का भी उल्लेख करते हुए सरकार से व्यापक चर्चा की जरूरत बताई।
बेरोजगारी और आय असमानता का मुद्दा उठाया
RJD सांसद ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में युवा रोजगार और बेहतर अवसरों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग राज्यों में युवा आंदोलनों के जरिए रोजगार, पारदर्शिता और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग उठा रहे हैं। मनोज झा के मुताबिक मौजूदा समय में युवाओं की प्राथमिकता रोजगार और आर्थिक सुरक्षा है, जबकि सरकार UCC जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर ज्यादा जोर दे रही है।

अमित शाह ने किया 2029 से पहले UCC लागू करने का दावा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान UCC को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA द्वारा शासित सभी 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी। शाह ने कहा कि कई राज्यों में UCC पहले ही लागू किया जा चुका है और बाकी राज्यों में भी इसे लागू करने को लेकर उन्हें पूरा विश्वास है।
NDA शासित राज्यों में बढ़ेगी चर्चा
अमित शाह के बयान के बाद NDA शासित राज्यों में UCC को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाएं तेज होने की संभावना है। बीजेपी लंबे समय से समान नागरिक संहिता को अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल करती रही है। ऐसे में 2029 से पहले सभी NDA शासित राज्यों में इसे लागू करने का लक्ष्य सामने रखे जाने के बाद विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
क्या है समान नागरिक संहिता?
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। इसके तहत मुख्य रूप से विवाह, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े नियम शामिल हो सकते हैं। UCC लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख राजनीतिक एजेंडे में रहा है और इसे लेकर देश में व्यापक राजनीतिक बहस जारी है।
उत्तराखंड बना UCC लागू करने वाला पहला राज्य
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना था। इसके बाद अन्य राज्यों में भी UCC को लागू करने या इस दिशा में आगे बढ़ने को लेकर पहल की गई है। अब अमित शाह के 2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में इसे लागू करने के दावे ने इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
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