Chhattisgarh Police : छत्तीसगढ़ में पुलिसकर्मियों और जांच अधिकारियों की कमी आपराधिक मामलों की विवेचना के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में डेढ़ लाख से अधिक आपराधिक मामलों की जांच लंबित है। पुलिस विभाग में 55 हजार से अधिक पद स्वीकृत हैं, लेकिन करीब 42 हजार पुलिसकर्मी ही कार्यरत बताए जा रहे हैं। इस तरह 13 हजार से अधिक पद खाली हैं। कर्मचारियों की कमी के चलते जांच अधिकारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है और मामलों के समय पर निपटारे को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इंस्पेक्टर और एसआई के पद भी खाली
पुलिस विभाग में केवल सामान्य बल की ही कमी नहीं है, बल्कि विवेचना से जुड़े महत्वपूर्ण पद भी रिक्त हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर यानी एसआई और असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर यानी एएसआई के 1,700 से अधिक पद खाली हैं। ऐसे में जांच अधिकारियों को सीमित संसाधनों के बीच कई मामलों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। बताया गया है कि प्रत्येक जांच अधिकारी पर औसतन 150 से अधिक मामलों का बोझ है। इतनी बड़ी संख्या में मामलों की जांच के लिए समय और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना पुलिस प्रशासन के सामने चुनौती है।

कानून-व्यवस्था के साथ विवेचना की दोहरी जिम्मेदारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच अधिकारियों का काम केवल आपराधिक मामलों की विवेचना तक सीमित नहीं रहता। उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने, वीआईपी सुरक्षा, विभिन्न आयोजनों में बंदोबस्त और विभागीय कार्यों की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण जांच के लिए निर्धारित समय प्रभावित होता है। किसी मामले में दस्तावेजों की पड़ताल, तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण, गवाहों के बयान दर्ज करना और आरोपितों की तलाश जैसी प्रक्रियाओं में समय लगता है। इसके अलावा फोरेंसिक रिपोर्ट मिलने में देरी भी कई मामलों की जांच को आगे बढ़ाने में बाधा बन सकती है।
हाई कोर्ट में भी उठा लंबित मामलों का मुद्दा
पुलिस विवेचना में देरी का मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में भी उठ चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लंबित मामलों से संबंधित जनहित याचिका पर जुलाई और अगस्त में हुई सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से दिए गए जवाबों पर सवाल उठे थे। अदालत ने पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी से शपथ पत्र भी मांगा था। न्यायिक स्तर पर मामला उठने के बाद लंबित विवेचनाओं और पुलिस संसाधनों की स्थिति पर ध्यान केंद्रित हुआ। हालांकि, भर्ती और जांच प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए अब तक हुई प्रगति के संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
13 हजार से अधिक पदों पर भर्ती का इंतजार
पुलिस विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए 13 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की घोषणाएं किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया की समय-सीमा और नियुक्तियों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से सवाल बने हुए हैं। नियुक्तियां पूरी होने में देरी का असर पहले से कार्यरत पुलिसकर्मियों पर पड़ रहा है। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, सीमित मानव संसाधन के कारण प्रत्येक मामले की जांच के लिए पर्याप्त समय देना कठिन हो जाता है। भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना इस समस्या के समाधान का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

लंबित मामलों के निपटारे के लिए क्या जरूरी?
राज्य में पुलिस के सामने एक साथ दो बड़ी जिम्मेदारियां हैं—नए अपराधों की जांच करना और पुराने लंबित मामलों का निराकरण करना। इसके लिए जिला स्तर पर मामलों की अवधि के अनुसार नियमित समीक्षा करना आवश्यक है। लंबे समय से अटकी विवेचनाओं के कारणों की पहचान, जांच अधिकारियों के कार्यभार का आकलन और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता पर ध्यान देना होगा। साथ ही, रिक्त पदों पर भर्ती के लिए स्पष्ट समय-सीमा और कार्ययोजना भी महत्वपूर्ण है। प्रभावी निगरानी, पर्याप्त कर्मचारी और तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग जांच प्रक्रिया को गति देने में मदद कर सकते हैं।
जांच में देरी से न्याय प्रक्रिया पर सवाल
आपराधिक मामलों की जांच समय पर पूरी होना न्याय प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है। विवेचना में लंबी देरी होने पर पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं को मामले की प्रगति का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, जांच अधिकारियों पर अधिक कार्यभार होने से प्रत्येक मामले को पर्याप्त समय देना कठिन हो सकता है। छत्तीसगढ़ में लंबित मामलों और रिक्त पदों के आंकड़े पुलिस व्यवस्था में मानव संसाधन बढ़ाने तथा जांच प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की जरूरत को रेखांकित करते हैं। अब भर्ती की स्थिति, जिला स्तर की निगरानी और विवेचना में सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदम अहम रहेंगे।
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