Ram Mandir Donation Controversy : अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चंदे और चढ़ावे को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर चर्चा में है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर केंद्र की भाजपा सरकार और मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मंदिर को समर्पित धन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए मामले की व्यापक जांच की मांग की। हालांकि, पोस्ट में लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

‘देव द्रव्य की चोरी महापाप’, जयराम रमेश का आरोप
जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट में कहा कि भगवान को समर्पित धन यानी चंदे और चढ़ावे की चोरी धार्मिक दृष्टि से महापाप मानी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर से जुड़े मामले में भी ऐसी गंभीर अनियमितताओं की आशंका सामने आई है। कांग्रेस नेता का दावा है कि इस पूरे प्रकरण को दबाने और जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। इन आरोपों पर संबंधित ट्रस्ट और अन्य पक्षों का आधिकारिक जवाब महत्वपूर्ण होगा।

प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने मंदिर ट्रस्ट के गठन और उसमें शामिल लोगों के चयन को लेकर भी सवाल किए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस से जुड़े लोगों को ट्रस्टी के रूप में चुना था। जयराम रमेश ने पूछा कि यदि ट्रस्ट की निगरानी में वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं, तो प्रधानमंत्री इस मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर मंदिर निर्माण का राजनीतिक श्रेय लेने और कथित अनियमितताओं पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।
चंदे और श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर आंकड़ों पर सवाल
जयराम रमेश ने अपने बयान में निधि समर्पण अभियान और मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के आंकड़ों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, आरएसएस और मंदिर ट्रस्ट से संबंधित आंकड़ों में वर्ष 2021 के निधि समर्पण अभियान तथा कॉर्पस दान को मिलाकर 3,264 करोड़ रुपये जमा होने की बात कही गई थी। उन्होंने श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे की रकम के बीच कथित अंतर पर सवाल उठाते हुए विस्तृत वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
82.78 करोड़ रुपये के चढ़ावे पर मांगा हिसाब
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच करीब 16 करोड़ श्रद्धालुओं के अयोध्या आने की बात कही गई, जबकि इसी अवधि में चढ़ावे की रकम 82.78 करोड़ रुपये बताई गई। उन्होंने इन आंकड़ों के आधार पर औसत चढ़ावे को लेकर सवाल खड़े किए। हालांकि, श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे के आंकड़ों की अवधि, स्रोत तथा गणना का आधिकारिक सत्यापन जरूरी है। केवल इन आंकड़ों के आधार पर चोरी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ से जवाब की मांग
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता को चंदे, कॉर्पस फंड और मंदिर में प्राप्त चढ़ावे का स्पष्ट हिसाब मिलना चाहिए। अब इस विवाद में मंदिर ट्रस्ट की प्रतिक्रिया, आधिकारिक वित्तीय विवरण और किसी स्वतंत्र जांच से सामने आने वाले तथ्य महत्वपूर्ण होंगे।
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