Operation Trident :केंद्र सरकार की नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, 23 अक्टूबर को असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस अभियान का उद्देश्य कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क और उससे जुड़े तस्करी तंत्र पर कार्रवाई करना था। शाह ने इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताया।

अमित शाह ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि संबंधित एजेंसियों ने तीनों पूर्वोत्तर राज्यों में समन्वित कार्रवाई की। उनके मुताबिक, अभियान के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल नेटवर्क को निशाना बनाया गया। उन्होंने कार्रवाई में शामिल केंद्रीय एजेंसियों और असम, मिजोरम तथा मणिपुर की पुलिस टीमों के प्रयासों की सराहना की। हालांकि, नेटवर्क से जुड़े सभी आरोपों और जांच के निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि आधिकारिक जांच के आधार पर ही की जा सकेगी।

100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता चलने का दावा
अमित शाह के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान लगभग 100 करोड़ रुपये के कथित हवाला लेनदेन का पता चला। इसके अलावा 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया। एजेंसियों ने 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने की जानकारी भी दी है। ये कदम कथित तौर पर नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाए गए। बैंक खातों और संपत्तियों से संबंधित अंतिम कानूनी स्थिति जांच और संबंधित प्राधिकरणों की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
18 लोगों की गिरफ्तारी और विस्फोटक सामग्री बरामद
गृह मंत्री द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस अभियान में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई के दौरान 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने का भी दावा किया गया। डेटोनेटर की बरामदगी को देखते हुए मामले में जांच का दायरा केवल मादक पदार्थों तक सीमित न रहकर अन्य संभावित गतिविधियों तक भी जा सकता है। हालांकि, बरामद सामग्री के इस्तेमाल, आरोपियों की भूमिका और संभावित आपराधिक संबंधों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
भारत-म्यांमार-बांग्लादेश सीमा से तस्करी का आरोप
अमित शाह के अनुसार, संबंधित नेटवर्क कथित तौर पर ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ के जरिए भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं से नशीले पदार्थों की तस्करी करता था। पूर्वोत्तर भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण इस क्षेत्र में सीमा पार अवैध गतिविधियों पर निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है। एजेंसियों की कार्रवाई का उद्देश्य कथित तस्करी नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े लोगों की पहचान करना बताया गया है। मामले में नेटवर्क के वास्तविक विस्तार और सीमा पार संपर्कों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

2029 तक नशीले पदार्थों के नेटवर्क खत्म करने का लक्ष्य
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने 31 दिसंबर 2029 तक नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने का संकल्प लिया है। ऑपरेशन ट्राइडेंट को इसी व्यापक अभियान की एक कड़ी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सरकार की नीति के तहत तस्करी, अवैध वित्तीय गतिविधियों और नशीले पदार्थों के वितरण से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करने पर जोर दिया जा रहा है।
जांच और आगे की कार्रवाई पर रहेगी नजर
तीनों राज्यों में हुई छापेमारी के बाद अब गिरफ्तार लोगों, जब्त संपत्तियों, फ्रीज खातों और बरामद सामग्री से जुड़े तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित नेटवर्क किस प्रकार संचालित होता था और उसमें किन लोगों की भूमिका थी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री के बयान पर आधारित है। जांच एजेंसियों के विस्तृत आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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