Brazil Election 2026 : ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने चुनाव में जीत दर्ज कर एक बार फिर देश की राजनीति में अपनी ताकत साबित की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक लूला अब चौथी बार राष्ट्रपति पद संभालने की तैयारी में हैं। दिए गए विवरण के अनुसार, उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को करीब 44 लाख वोटों के अंतर से हराया। उनका नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होना बताया गया है। लूला ने जीत को लोकतंत्र के समर्थन में जनता का फैसला करार दिया।

लोकतंत्र और राष्ट्रीय संप्रभुता पर लूला का जोर
चुनाव में जीत के बाद लूला ने कहा कि मतदाताओं ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान किया। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विदेशी दखल को रोकने की बात भी कही। अमेरिका की ओर इशारा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्राजील किसी दूसरे देश के निर्देशों पर नहीं चलेगा। उनका कहना था कि देश के फैसलों में जनता की भागीदारी बढ़ाई जाएगी और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी नेताओं का राजनीतिक प्रभाव बढ़ रहा है।

अमेरिका के प्रभाव के विरोधियों को मिली राहत
लूला की जीत को लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभाव का विरोध करने वाली ताकतों के लिए अहम माना जा रहा है। ब्राजील और मेक्सिको इस क्षेत्र के सबसे अधिक आबादी वाले देशों में शामिल हैं और दोनों में वामपंथी विचारधारा वाली सरकारें बनी हुई हैं। लगभग 2.6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले ब्राजील के लिए व्यापार नीति भी बड़ा मुद्दा रही। चुनाव प्रचार के दौरान लूला ने कहा था कि देश को अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से लेने चाहिए। अमेरिका द्वारा ब्राजील पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ दोनों देशों के बीच तनाव की एक वजह बने।
मतदान का समय बढ़ाने के फैसले पर विवाद
ब्राजील के चुनाव में मतदान का समय बढ़ाने को लेकर विवाद भी सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, मतदान समाप्त होने से तीन मिनट पहले सुप्रीम कोर्ट के जज क्रिस्टियानो जानिन ने मतदान के लिए दो घंटे अतिरिक्त देने का आदेश दिया। यह कदम दोनों उम्मीदवारों की मांग के बाद उठाया गया था। लूला ने साओ पाउलो और साल्वाडोर में मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने वाली बसों में परेशानी का उल्लेख किया था। वहीं, बोल्सोनारो ने दक्षिणी ब्राजील में भारी बारिश का हवाला दिया।
बोल्सोनारो ने नतीजे रद्द कराने की बात कही
बोल्सोनारो ने मतदान का समय बढ़ाने के फैसले को अस्वीकार्य बताते हुए दूसरे दौर के नतीजे रद्द कराने की मांग करने की बात कही। इस फैसले के कारण मतगणना दो घंटे देर से शुरू हुई। कुछ मतदान केंद्रों पर मशीनें बंद हो चुकी थीं और उन्हें दोबारा चालू नहीं किया जा सका। हालांकि, अतिरिक्त समय में कितने केंद्रों पर मतदान हुआ, यह स्पष्ट नहीं बताया गया। बोल्सोनारो के सहयोगी निकोलस फरेरा ने भी आदेश पर सवाल उठाए, क्योंकि जानिन पहले लूला के वकील रह चुके थे।

महंगाई, खाद्य कीमतें और अपराध बने चुनावी मुद्दे
पहले दौर में बोल्सोनारो को 47 प्रतिशत और लूला को 45 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बाद लूला ने युवाओं के बीच अपना संपर्क बढ़ाया। चुनाव में महंगाई, खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतें और अपराध प्रमुख मुद्दे रहे। दोनों पक्षों के परिवारों और सहयोगियों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। लूला को पहले भ्रष्टाचार के मामलों में जेल हुई थी, लेकिन बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई।
मजदूर नेता से राष्ट्रपति तक लूला का सफर
लूला ने 1970 के दशक में मजदूर संगठन के नेता के रूप में राजनीति शुरू की और वर्कर्स पार्टी बनाने में अहम भूमिका निभाई। वह 2002 और 2006 में राष्ट्रपति चुने गए। बाद में उनकी सहयोगी दिल्मा रूसेफ राष्ट्रपति बनीं, जिन्हें 2016 में महाभियोग के जरिए पद से हटाया गया। 2018 में जेल के कारण लूला चुनाव नहीं लड़ सके और 580 दिन बाद रिहा हुए। 2022 में उन्होंने जायर बोल्सोनारो को हराया था। अब लगभग 81 वर्ष की उम्र में उनका अगला कार्यकाल ब्राजील की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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