Delhi Lawyers Strike : दिल्ली की सभी जिला अदालतों में मंगलवार, 27 अक्टूबर को वकील न्यायिक कार्यों से दूर रहेंगे। जिला अदालत बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति (कोऑर्डिनेशन कमिटी) ने सोमवार को यह घोषणा की। समिति के मुताबिक, यह विरोध शाहदरा पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर वकीलों को धमकाए जाने और पुलिस की कार्रवाई के तरीके को लेकर किया जा रहा है। वकील अपने एक साथी पर हुए हमले के मामले में उचित कार्रवाई की मांग करने पुलिस स्टेशन पहुंचे थे।

ACP मनस्वी वशिष्ठ पर रिवॉल्वर दिखाकर धमकाने का आरोप
बार एसोसिएशनों की समिति ने आरोप लगाया है कि शाहदरा पुलिस स्टेशन में शिकायत और कार्रवाई की मांग के दौरान ACP मनस्वी वशिष्ठ ने कथित तौर पर अपनी रिवॉल्वर दिखाकर वहां मौजूद वकीलों को डराया और धमकाया। इस घटना को समिति ने गंभीर मामला बताया है। हालांकि, ये आरोप समिति के प्रस्ताव में सामने आए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।

ACP और SHO को सस्पेंड करने की मांग
सोमवार को पारित प्रस्ताव में समन्वय समिति ने मांग की कि घटना की निष्पक्ष जांच पूरी होने तक ACP मनस्वी वशिष्ठ और संबंधित स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को तत्काल निलंबित किया जाए। समिति का कहना है कि मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और वकीलों की शिकायत पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। इसी मांग के समर्थन में मंगलवार को दिल्ली की सभी जिला अदालतों में न्यायिक कामकाज से दूर रहने का फैसला लिया गया है।
वकील ललित बंसल पर हमले से जुड़ा है मामला
समिति के प्रस्ताव के अनुसार, यह विवाद शाहदरा पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी (FIR) से जुड़े मामले से शुरू हुआ। वकील ललित बंसल पर कथित तौर पर हमला किया गया था, जिसमें उनके सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। इस मामले में वकील अमूल्य रतन शिकायतकर्ता बताए गए हैं। घटना के बाद वकील आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
23 अक्टूबर को पुलिस स्टेशन पहुंचे थे वकील
प्रस्ताव में कहा गया है कि 23 अक्टूबर की शाम कुछ वकील हमले के मामले में कार्रवाई की मांग लेकर शाहदरा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। समिति के मुताबिक, उस समय ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO ने वकीलों को आश्वासन दिया था कि आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। हालांकि, समिति का दावा है कि अगले दिन, 24 अक्टूबर को वकीलों को जानकारी मिली कि आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और उन्हें पुलिस स्टेशन बुलाने के बाद छोड़ दिया गया।

दोबारा शिकायत करने पहुंचे तो धमकाने का आरोप
समिति के अनुसार, पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने और जवाबदेही की मांग करने के लिए वकील दोबारा पुलिस स्टेशन पहुंचे। इसी दौरान ACP पर कथित तौर पर रिवॉल्वर दिखाकर वकीलों को धमकाने का आरोप लगाया गया। समिति ने कहा कि वकील अपने गंभीर रूप से घायल साथी के मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे थे, इसलिए इस घटना को वह विशेष रूप से गंभीर मानती है।
पुलिस के व्यवहार पर भी उठाए सवाल
समन्वय समिति ने पुलिसकर्मियों द्वारा वकीलों के साथ कथित अनुचित और कठोर व्यवहार पर भी चिंता जताई है। समिति का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने और कानूनी कार्रवाई की मांग करने वालों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। मंगलवार की हड़ताल के जरिए वकील निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं। इस मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और जांच की स्थिति सामने आने के बाद घटनाक्रम की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
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