US Fed Rate Decision : अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की फेडरल ओपन मार्केट कमिटी (FOMC) ने 28 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में बेंचमार्क ब्याज दरों को 3.75% से 4% के दायरे में स्थिर रखने का फैसला किया। यह निर्णय 10-2 के मतदान से लिया गया। दो अधिकारियों ने इसके विपरीत ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी का समर्थन किया। अब निवेशकों की निगाहें दिसंबर की अगली बैठक पर टिकी हैं।

महंगाई और आर्थिक आंकड़ों के बीच फेड की सावधानी
फेड ने ब्याज दरों में तत्काल बदलाव करने के बजाय आर्थिक परिस्थितियों का और आकलन करने का रुख अपनाया है। केंद्रीय बैंक के सामने महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को बनाए रखने की दोहरी चुनौती है। नीतिगत फैसले में आगे मिलने वाले आर्थिक आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। महंगाई का ऊंचा स्तर ब्याज दरों में कटौती की संभावना को सीमित कर सकता है।

अमेरिका की अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत
FOMC के बयान के मुताबिक, अमेरिका में आर्थिक गतिविधियां मजबूत गति से आगे बढ़ रही हैं। घरेलू खर्च में मजबूती बनी हुई है, उत्पादकता में सुधार हो रहा है और पूंजी निवेश भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है। रोजगार की स्थिति में भी बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया है। मजबूत आर्थिक गतिविधियों के कारण फेड को तत्काल ब्याज दरें घटाने की जरूरत कम महसूस हो सकती है।
महंगाई दर 3.7 प्रतिशत तक पहुंची
अमेरिका में महंगाई फेड के लिए प्रमुख चिंता बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में मासिक आधार पर 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि अगस्त में यह बढ़ोतरी 0.4 प्रतिशत थी। सालाना महंगाई दर भी अगस्त के 3.4 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 3.7 प्रतिशत हो गई। पेट्रोल की कीमतों में 9.1 प्रतिशत और ऊर्जा सूचकांक में 5.2 प्रतिशत की तेजी ने महंगाई पर दबाव बढ़ाया।
ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में दो अधिकारियों का मत
बैठक में समिति के भीतर नीतिगत मतभेद सामने आए। लिसा कुक और क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमैक ने ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले का विरोध किया और 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी का समर्थन किया। उनका रुख महंगाई पर काबू पाने के लिए सख्त मौद्रिक नीति की जरूरत को दर्शाता है।

दिसंबर में क्या फिर बढ़ सकती हैं दरें?
फेड की अगली बैठक 8 और 9 दिसंबर 2026 को निर्धारित है। फिलहाल केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों की अगली दिशा को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। बाजार में दिसंबर की बैठक के दौरान दरें बढ़ने की संभावना पर चर्चा तेज है। हालांकि, किसी भी फैसले से पहले महंगाई, रोजगार और आर्थिक विकास के नए आंकड़ों पर नजर रखी जाएगी।
भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर क्या होगा असर?
अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने से डॉलर आधारित निवेश आकर्षक हो सकता है। ऐसी स्थिति में विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकालने या नए निवेश को सीमित करने का फैसला कर सकते हैं। इससे भारतीय शेयर सूचकांकों और रुपये पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि, वास्तविक असर वैश्विक बाजारों, विदेशी निवेश के प्रवाह और भारत की आर्थिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

