Israel Election Result : इजरायल के आम चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, लेकिन वह संसद में बहुमत के आंकड़े से दूर है। उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष के सामने भी सरकार बनाने की चुनौती है। अब सभी की निगाहें गठबंधन की संभावनाओं पर टिकी हैं।

91.1 प्रतिशत मतगणना के बाद क्या है सीटों का गणित?
उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, 91.1 प्रतिशत वोटों की गिनती के बाद लिकुड पार्टी को 26 सीटें मिली हैं। नेतन्याहू के गठबंधन के पास कुल 53 सीटें बताई गई हैं। इजरायल की 120 सदस्यीय संसद नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। इस तरह नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से आठ सीट पीछे है।

विपक्ष और अरब पार्टियों की भूमिका अहम
यहूदी नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 48 सीटें मिलने की जानकारी सामने आई है। वहीं, जॉइंट लिस्ट और रा’म जैसी अरब पार्टियों के पास क्रमशः 12 और 7 सीटें बताई गई हैं। इन आंकड़ों के आधार पर नेतन्याहू विरोधी दलों की संभावित संख्या 67 तक पहुंचती है। हालांकि, केवल सीटों का जोड़ सरकार बनने की गारंटी नहीं है। सभी दलों के बीच राजनीतिक सहमति जरूरी होगी।
मतदान प्रतिशत में भी दर्ज हुई बढ़ोतरी
चुनाव में मतदान प्रतिशत 77.7 तक पहुंचने की जानकारी दी गई है, जबकि 2022 के चुनाव में यह आंकड़ा 70.6 प्रतिशत था। अधिक मतदान के बावजूद किसी एक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलना सरकार गठन को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। राजनीतिक दल अब समर्थन जुटाने और संभावित सहयोगियों के साथ बातचीत की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
बहुमत नहीं मिलने पर भी प्रधानमंत्री पद खाली नहीं होगा
अगर कोई दल या गठबंधन तुरंत सरकार बनाने में सफल नहीं होता, तो मौजूदा सरकार कार्यवाहक सरकार के रूप में काम जारी रख सकती है। ऐसी स्थिति में नेतन्याहू नई सरकार के गठन तक प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां निभाते रह सकते हैं। हालांकि, लंबे समय तक राजनीतिक गतिरोध बने रहने से सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और संसद के कामकाज पर असर पड़ सकता है।

राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका
इजरायल में सरकार गठन की प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग की अहम भूमिका होती है। राष्ट्रपति संसद में प्रतिनिधित्व पाने वाले दलों के नेताओं से सलाह-मशविरा करते हैं। इसके बाद वह उस सांसद को सरकार बनाने का अवसर दे सकते हैं, जिसके पास बहुमत जुटाने की बेहतर संभावना हो। यह जरूरी नहीं है कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता को ही पहला मौका मिले।
सरकार बनाने के लिए कितना मिलता है समय?
सरकार बनाने का अवसर मिलने वाले नेता को सामान्यतः 28 दिन का समय दिया जाता है। राष्ट्रपति जरूरत पड़ने पर इस अवधि को अधिकतम 14 दिन तक बढ़ा सकते हैं। यदि पहला प्रयास असफल रहता है, तो किसी दूसरे सांसद को मौका मिल सकता है। आगे की कोशिशें भी नाकाम होने पर संसद भंग होने और नए चुनाव की संभावना पैदा हो सकती है।
क्या एकता सरकार से खत्म होगा गतिरोध?
राजनीतिक संकट का एक संभावित समाधान व्यापक गठबंधन सरकार हो सकता है, जिसमें लिकुड और विपक्ष के कुछ दल साथ आएं। हालांकि, नेतन्याहू और विपक्षी नेताओं के बीच गहरे मतभेद इस विकल्प को मुश्किल बनाते हैं। दूसरी ओर, विपक्ष अरब दलों के समर्थन से बहुमत जुटाने की कोशिश कर सकता है, लेकिन इस रास्ते में भी वैचारिक असहमतियां बाधा बन सकती हैं।
अरब दल बन सकते हैं किंगमेकर
अरब पार्टियों का समर्थन सरकार गठन में निर्णायक साबित हो सकता है। विपक्षी नेता यायर गोलान ने गादी आइजनकोट, यायर लैपिड और अन्य नेताओं के साथ बातचीत की योजना जताई है। गोलान अरब दलों को नई सरकार में शामिल करने के समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में इन पार्टियों की भूमिका आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण हो सकती है।
लिबरमैन का दोटूक बयान, गठबंधन की राह मुश्किल
इजरायल बेतेनु पार्टी के अध्यक्ष एविगडोर लिबरमैन ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी न तो नेतन्याहू के साथ सरकार बनाएगी और न ही अहमद टिबी के साथ गठबंधन करेगी। उनका यह रुख संभावित राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बनाता है। अब देखना होगा कि कौन-सा गठबंधन बहुमत जुटाता है और इजरायल में नई सरकार का रास्ता कैसे निकलता है।
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