Mahatma Gandhi Grandson : महात्मा गांधी के पोते स्वर्गीय कानू गांधी और उनकी पत्नी शिवा गांधी से जुड़ी अमेरिका की एक संपत्ति का कानूनी विवाद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका की एक अदालत ने जमीन पर कथित अवैध कब्जे के मामले में गांधी परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कब्जा करने वाले व्यक्ति को संपत्ति खाली करने का आदेश दिया है। यह फैसला गुजरात के सूरत निवासी परिमल देसाई की करीब 20 महीने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है।

वर्जीनिया में 30 एकड़ जमीन को लेकर था विवाद
यह मामला अमेरिका के वर्जीनिया राज्य के वॉरेन काउंटी में स्थित करीब 30 एकड़ जमीन से जुड़ा है। यह संपत्ति शेनांडोआ नेशनल पार्क के पास है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कानू गांधी और उनकी पत्नी शिवा गांधी ने वर्ष 1987 में इस जमीन को खरीदा था। बाद में दोनों ने गुजरात में अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए और अपनी संपत्ति को एक चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया।

चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं परिमल देसाई
गांधी दंपति की संपत्ति से संबंधित ट्रस्ट का नाम ‘द डॉ. शिवा एंड कानू रामदास मोहनदास गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट’ है। वर्तमान में परिमल देसाई इसके मैनेजिंग ट्रस्टी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने ही अमेरिका में स्थित जमीन पर कब्जे से जुड़े विवाद को अदालत तक पहुंचाया और ट्रस्ट के संपत्ति अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी।
ग्रेगरी ब्लैक ने एडवर्स पजेशन के तहत जताया था दावा
टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) से बातचीत में परिमल देसाई ने बताया कि विवाद की शुरुआत 10 जनवरी 2025 को हुई थी। उनके मुताबिक, अमेरिकी नागरिक ग्रेगरी ब्लैक ने उनके घर पर कानूनी नोटिस भेजकर वर्जीनिया के एडवर्स पजेशन कानून के तहत जमीन पर अपना दावा जताया था। इस कानूनी सिद्धांत के तहत कुछ निर्धारित शर्तें पूरी होने पर लंबे समय तक जमीन पर वास्तविक कब्जा रखने वाला व्यक्ति उसके स्वामित्व का दावा कर सकता है।
जमीन पर कब्जे की कानूनी शर्तें साबित नहीं कर सका दावा
देसाई के अनुसार, वर्जीनिया के नियमों में एडवर्स पजेशन के तहत स्वामित्व का दावा करने के लिए पांच शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इनमें निर्धारित अवधि तक वास्तविक और लगातार कब्जा शामिल है। उन्होंने बताया कि ग्रेगरी ब्लैक जमीन पर अपने वास्तविक कब्जे से जुड़ी आवश्यक शर्तें साबित नहीं कर सके। इसी आधार पर ट्रस्ट की ओर से कानूनी चुनौती दी गई। आखिरकार अदालत ने जमीन खाली करने का आदेश जारी किया।

2013 में भारत लौट आए थे कानू गांधी और शिवा गांधी
कानू गांधी और उनकी पत्नी शिवा गांधी वर्ष 2013 में अमेरिका से भारत लौट आए थे। दोनों ने गुजरात में अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए। नवंबर 2016 में सूरत में कानू गांधी का निधन हो गया। उनकी वसीयत के अनुसार, उनकी संपत्ति का अधिकार पत्नी शिवा गांधी को मिला। इसके बाद शिवा गांधी ने वर्ष 2018 में चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की और अपनी वसीयत भी पंजीकृत कराई।
शिवा गांधी के निधन के बाद देसाई ने संभाली जिम्मेदारी
वर्ष 2020 में शिवा गांधी के निधन के बाद उनकी वसीयत के अनुसार संपत्ति से जुड़े प्रावधान लागू किए गए। इसके बाद परिमल देसाई ने ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में पहली बार वह वर्जीनिया स्थित इस संपत्ति पर पहुंचे थे।
4500 डॉलर खर्च कर कराया जमीन का सर्वे
परिमल देसाई के मुताबिक, जमीन की वास्तविक स्थिति और सीमाओं की जानकारी लेने के लिए उन्होंने करीब 4,500 डॉलर खर्च करके सर्वे कराया था। उनका कहना था कि यदि ट्रस्ट को इस संपत्ति का उपयोग करना है या इसके संबंध में कोई निर्णय लेना है तो जमीन पर उसका अधिकार और कब्जा सुनिश्चित होना जरूरी है। अब अदालत के आदेश के बाद ट्रस्ट को इस संपत्ति पर अपना अधिकार सुरक्षित रखने की दिशा में राहत मिली है।


