Mallikarjun Kharge : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित जन-महाभियोग कार्यक्रम के दौरान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। अपने आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में खरगे ने कहा कि कांग्रेस का मुख्य चुनाव आयुक्त से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। पार्टी की मांग केवल इतनी है कि देश में चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री के इशारे पर काम कर रहे हैं।

वोट का अधिकार खतरे में होने का लगाया आरोप
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश में नागरिकों का वोट देने का अधिकार खतरे में है। लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए इस अधिकार की रक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाएगी। खरगे के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।

मीरा कुमार ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठाए सवाल
कार्यक्रम से पहले कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी नागरिक को मतदान करने से रोकना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। मीरा कुमार ने आरोप लगाया कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त निष्पक्ष भूमिका नहीं निभा रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता भी मीरा कुमार ने की।
सोनिया और प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेता पहुंचे
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित इस जन-महाभियोग कार्यक्रम में कांग्रेस और विपक्ष के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी सहित विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी हिस्सा लिया। इस आयोजन के जरिए विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सार्वजनिक रूप से सामने रखीं।
शशि थरूर बोले- निष्पक्ष अंपायर की भूमिका पर उठे सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव प्रक्रिया के निष्पक्ष अंपायर के रूप में अपनी विश्वसनीयता खो दी है। उनके अनुसार, विपक्ष इस संदेश को मजबूती से जनता तक पहुंचाना चाहता है। थरूर ने यह भी कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से दिए गए महाभियोग संबंधी नोटिस को लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने स्वीकार नहीं किया है।

संसद में चर्चा नहीं होने पर सार्वजनिक कार्यक्रम का रास्ता
शशि थरूर ने कहा कि यदि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति नोटिस स्वीकार करते हैं, तो विपक्ष संसद के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने गृह मंत्री से भी आग्रह किया कि वे दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों को नोटिस स्वीकार करने की सलाह दें। थरूर के मुताबिक, संसद में चर्चा का रास्ता नहीं खुलने के कारण विपक्ष ने सार्वजनिक मंच के जरिए अपनी बात रखने का विकल्प चुना है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर बढ़ा राजनीतिक टकराव
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के आरोपों और जन-महाभियोग कार्यक्रम के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस और विपक्षी दल इसे लोकतंत्र तथा मताधिकार की रक्षा से जुड़ा मामला बता रहे हैं, जबकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के संकेत हैं।
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