Indian Stock Market : भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला एक साल निवेशकों के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। दिवाली 2025 से दिवाली 2026 तक बाजार में कई बार तेजी देखने को मिली, लेकिन वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और लगातार बिकवाली ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अमेरिका और अन्य देशों के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की महंगाई, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की निकासी ने भारतीय बाजार पर दबाव बनाए रखा।

निफ्टी से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप तक आई गिरावट
23 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले दिवाली से इस दिवाली तक निफ्टी 50 में 10.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, निफ्टी 500 भी 7.8 प्रतिशत टूट चुका है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी बाजार की कमजोरी से अछूते नहीं रहे। निफ्टी मिडकैप 100 में 4.5 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 3.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। इससे निवेशकों के पोर्टफोलियो पर व्यापक असर पड़ा है।

83 बड़ी कंपनियों के शेयरों में आई भारी गिरावट
बाजार की कमजोरी का सबसे ज्यादा असर कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। पिछले दिवाली से अब तक 83 लार्जकैप कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इनमें कुछ शेयर करीब 60 प्रतिशत तक टूट गए। स्विगी, टाटा मोटर्स, एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, आईटीसी, वेदांता, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे बड़े नाम इस सूची में शामिल हैं।
इन सात बड़ी कंपनियों ने निवेशकों को दिया शानदार रिटर्न
गिरावट के बीच कुछ कंपनियों ने बाजार को सकारात्मक प्रदर्शन से चौंकाया भी है। पिछले दिवाली के मुकाबले केवल 43 लार्जकैप शेयरों में तेजी दर्ज की गई। इनमें बीएचईएल, हिताची एनर्जी, एसएएमआईएल, टाइटन, श्रीराम फाइनेंस, हिंडाल्को और अडानी पावर प्रमुख हैं। इन कंपनियों के शेयरों में अधिकतम 70 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली।
क्या लार्जकैप शेयरों में निवेश का सही मौका आ गया है?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार गिरावट के बाद कई बड़ी कंपनियों के शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हो सकते हैं। निफ्टी फिलहाल अगले एक साल की अनुमानित कमाई के मुकाबले 16.4 गुना के मूल्यांकन पर कारोबार कर रहा है, जबकि इसका दीर्घकालिक औसत 18.4 गुना है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चुनिंदा शेयरों में अवसर बन सकता है। हालांकि, निवेश से पहले कंपनियों की वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन जरूरी है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी बाजार की सबसे बड़ी चिंता
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। सितंबर तिमाही में कम से कम 53 ऐसी बड़ी कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटी, जिनका बाजार पूंजीकरण एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक है। एचडीएफसी बैंक में विदेशी हिस्सेदारी 2.43 प्रतिशत अंक कम हुई। वहीं, आईटीसी में 1.01 और महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.55 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज की गई।रिलायंस इंडस्ट्रीज में भी विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 0.52 प्रतिशत अंक घट गई। इस साल कंपनी का शेयर लगभग 24.2 प्रतिशत टूट चुका है। टीसीएस, भारती एयरटेल, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर और एचडीएफसी लाइफ में भी दबाव देखने को मिला।
7.1 प्रतिशत GDP ग्रोथ का अनुमान, फिर भी इन चुनौतियों से रहेगी चिंता
भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर मानसून महंगाई तथा ग्रामीण मांग के लिए चुनौती बन सकते हैं।
आने वाले साल में शेयर बाजार की दिशा क्या होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में गिरावट के बाद चुनिंदा लार्जकैप शेयरों में निवेश के अवसर बन सकते हैं। हालांकि, विदेशी निवेशकों की वापसी, वैश्विक ब्याज दरें, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय सोच-समझकर और लंबी अवधि की रणनीति के साथ निवेश करना चाहिए।


