Hylo Open 2026 : भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। सिंधु ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को जर्मनी में आयोजित हाइलो ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट का महिला एकल खिताब अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने डेनमार्क की खिलाड़ी लाइन होजमार्क कजेरफेल्ट को सीधे गेमों में हराकर ट्रॉफी जीती। इस सीजन में यह सिंधु का दूसरा बड़ा खिताब है। इससे पहले जुलाई में उन्होंने जापान ओपन में भी जीत दर्ज की थी।
39 मिनट में डेनिश खिलाड़ी को दी शिकस्त
फाइनल मुकाबले में दुनिया की आठवें नंबर की भारतीय खिलाड़ी सिंधु ने शुरुआत से ही आक्रामक और नियंत्रित खेल दिखाया। दूसरी वरीयता प्राप्त सिंधु ने दुनिया की 25वें नंबर की डेनिश खिलाड़ी को 39 मिनट तक चले मुकाबले में 21-12 और 21-14 से हराया। उनके शानदार स्ट्रोक-प्ले, तेज रिटर्न, कोर्ट कवरेज और नेट पर सटीक खेल के सामने कजेरफेल्ट लगातार दबाव में नजर आईं। सिंधु ने पूरे मुकाबले में अपनी लय बनाए रखी और प्रतिद्वंद्वी को वापसी का ज्यादा मौका नहीं दिया।

9200 रैंकिंग पॉइंट से मजबूत हुई वर्ल्ड टूर फाइनल्स की उम्मीद
हाइलो ओपन का खिताब जीतने के साथ ही सिंधु को 9,200 रैंकिंग पॉइंट मिले हैं। इन अंकों से सीजन के अंत में होने वाले BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए क्वालीफाई करने की उनकी उम्मीदों को मजबूती मिली है। पिछले सप्ताह ही सिंधु फ्रेंच ओपन के फाइनल तक पहुंची थीं, लेकिन वहां उन्हें उपविजेता रहना पड़ा था। फ्रांस में खिताब से चूकने के बाद उन्होंने जर्मनी में शानदार वापसी की और इस बार फाइनल में जीत हासिल कर ट्रॉफी अपने नाम कर ली।

लाइन कजेरफेल्ट के खिलाफ सिंधु का रिकॉर्ड बेहतर
फाइनल से पहले दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबलों का रिकॉर्ड भी सिंधु के पक्ष में था। अब तक हुए सात मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ी ने छह बार जीत दर्ज की थी, जबकि डेनमार्क की खिलाड़ी को केवल एक बार सफलता मिली थी। कजेरफेल्ट की यह इकलौती जीत वर्ष 2025 के सुदीरमन कप फाइनल्स में आई थी। इस मजबूत रिकॉर्ड और मौजूदा फॉर्म के साथ कोर्ट पर उतरी सिंधु ने फाइनल में भी अपना दबदबा कायम रखा।
पहले गेम में 21-12 से बनाई बढ़त
पहले गेम की शुरुआत में सिंधु ने क्रॉस-कोर्ट विनर लगाकर अपना इरादा साफ कर दिया। हालांकि, शुरुआती दौर में कुछ गलतियों के कारण कजेरफेल्ट ने स्कोर 3-3 से बराबर कर लिया। इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने बेहतर शॉट चयन और तेज नेट प्ले के जरिए मुकाबले पर पकड़ बनानी शुरू की। ब्रेक के समय सिंधु 11-8 से आगे थीं। ब्रेक के बाद भी उन्होंने लगातार अंक जुटाए और स्कोर 17-12 तक पहुंचा दिया। आखिरकार सिंधु ने पहला गेम 21-12 से जीत लिया।

दूसरे गेम में भी कायम रहा भारतीय खिलाड़ी का दबदबा
दूसरे गेम में भी सिंधु ने आक्रामक रणनीति जारी रखी। उन्होंने कोर्ट के खाली हिस्सों को निशाना बनाते हुए शानदार विनर लगाए और शुरुआती बढ़त हासिल की। कजेरफेल्ट ने वापसी की कोशिश की, लेकिन सिंधु ने अपनी लय बरकरार रखी। डेनिश खिलाड़ी की नेट पर हुई गलतियों का भारतीय शटलर ने पूरा फायदा उठाया। सिंधु ने 17-11 की बढ़त बनाने के बाद मैच में छह चैंपियनशिप पॉइंट हासिल किए और अंततः 21-14 से गेम जीतकर खिताब पर कब्जा कर लिया।
जापान ओपन के बाद सीजन की दूसरी ट्रॉफी
हाइलो ओपन की जीत सिंधु के लिए इस सीजन की दूसरी बड़ी उपलब्धि है। जापान ओपन के बाद अब जर्मनी में मिली इस सफलता ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है। फ्रेंच ओपन में उपविजेता रहने के बाद खिताब जीतना उनके शानदार प्रदर्शन की निरंतरता को भी दर्शाता है। अब उनकी नजर BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स में जगह बनाने पर रहेगी।
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