Supreme Court Ram Temple : अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर को लेकर एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के निर्माण की जगह को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। इस याचिका में मंदिर के निर्माण के लिए निर्धारित जमीन को लेकर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि अयोध्या में बन रहा राम जन्मभूमि मंदिर वास्तव में उसी जमीन पर बनाया गया है या नहीं, जिसका आवंटन सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में किया था।
याचिका में क्या उठाया गया था सवाल?
याचिका का मुख्य मुद्दा राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण स्थल की वास्तविक स्थिति और जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने यह सवाल रखा था कि मंदिर का निर्माण जिस स्थान पर किया गया है, क्या वह वही भूमि है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले के माध्यम से राम मंदिर निर्माण के लिए निर्धारित किया था।याचिकाकर्ता की ओर से जमीन के राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेजों और अन्य संबंधित अभिलेखों के आधार पर इस मामले की पुष्टि करने की मांग की गई थी। उनका कहना था कि दस्तावेजों की जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मंदिर का निर्माण न्यायालय के आदेश में निर्धारित जमीन पर ही हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से किया इनकार
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत के इस रुख के बाद याचिका में उठाए गए जमीन से संबंधित सवालों पर न्यायिक स्तर पर कोई नई विस्तृत जांच शुरू नहीं हो सकी।हालांकि, इस घटनाक्रम को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही नवंबर 2019 में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना चुका है। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने विवादित भूमि रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया गया था।

2019 के ऐतिहासिक फैसले में क्या था आदेश?
सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन फैसले के अनुसार, केंद्र सरकार को विवादित स्थल पर मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया गया था। इसी फैसले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।इस फैसले ने दशकों पुराने अयोध्या भूमि विवाद का कानूनी समाधान प्रस्तुत किया था। इसके बाद मंदिर निर्माण का काम शुरू हुआ और जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया।
अब क्यों महत्वपूर्ण है सुप्रीम कोर्ट का रुख?
राम मंदिर निर्माण स्थल को लेकर दायर इस नई याचिका ने एक बार फिर जमीन के दस्तावेजों और 2019 के फैसले के क्रियान्वयन से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है। याचिकाकर्ता जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर निर्माण स्थल की पुष्टि चाहता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करने से इनकार कर दिया।अदालत के इस रुख का मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि याचिका में लगाए गए सवालों की न्यायिक जांच के बाद कोई निष्कर्ष दिया गया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत ने याचिका पर सुनवाई नहीं की है। ऐसे में इस मामले से जुड़ी किसी भी नई कानूनी कार्रवाई या आधिकारिक स्पष्टीकरण पर आगे नजर बनी रहेगी।

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