Satya Niketan Building Collapse : दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण इमारत हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने एक के बाद एक पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार भी शामिल हैं। इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि राहत और बचाव अभियान अभी जारी है।
MCD के पांच अधिकारी निलंबित
सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद जिन पांच अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है, उनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, साउथ जोन के SE रणवीर सिंह, बिल्डिंग विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। इनमें डिप्टी कमिश्नर स्तर के अधिकारी का निलंबन इस कार्रवाई को खासा महत्वपूर्ण बनाता है।
हादसे में सात लोगों की मौत
दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के नजदीक सत्य निकेतन की एक संकरी गली में रविवार दोपहर करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। बताया गया कि इस भवन का इस्तेमाल लड़कों के पेइंग गेस्ट यानी PG के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। अब तक 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि मलबे में अन्य लोगों के दबे होने की आशंका के चलते तलाश जारी है।
PG में रह रहे थे छात्र
हादसे की चपेट में आई इमारत में छात्र पेइंग गेस्ट के तौर पर रह रहे थे। ऐसे में घटना के बाद इलाके में रहने वाले छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई। संकरी और भीड़भाड़ वाली गलियों वाले सत्य निकेतन क्षेत्र में बड़ी संख्या में छात्रावास, पीजी और भोजनालय संचालित होते हैं। हादसे ने इन इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इमारत मालिक समेत अन्य पर केस दर्ज
पुलिस ने इस मामले में साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है। पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें गठित की हैं।
मरम्मत के दौरान इमारत गिरने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, हादसे के समय इमारत के भूतल पर मरम्मत का काम चल रहा था। आरोप है कि इसी काम के दौरान इमारत की संरचना प्रभावित हुई और इसके बाद पूरा भवन ढह गया। हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी को लेकर जांच की जा रही है। प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई के बीच यह भी देखा जा रहा है कि भवन में निर्माण और मरम्मत से जुड़े नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
G+1 की मिली थी अनुमति, बनी G+4 इमारत
MCD के अनुसार, यह इमारत करीब 30 साल पुरानी थी और पुनर्वास कॉलोनी में लगभग 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी थी। रिकॉर्ड के मुताबिक, भवन के निर्माण के लिए पहले केवल ग्राउंड फ्लोर और एक मंजिल यानी G+1 की अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद यह इमारत ग्राउंड फ्लोर के ऊपर चार मंजिलों यानी G+4 तक बनी हुई थी। इस अंतर को लेकर भी जांच के दायरे में निर्माण और निगरानी व्यवस्था आ गई है।
महिला PG की इमारत भी सील
MCD ने आसपास स्थित एक अन्य इमारत पर भी कार्रवाई की है। यह भवन महिलाओं के PG के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। निगम ने वहां रहने वाले किरायेदारों को बाहर निकालने के बाद इमारत को सील कर दिया। सत्य निकेतन जैसे छात्र बहुल इलाके में इस कार्रवाई के बाद अन्य PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी निगरानी बढ़ने की संभावना है।
रेस्क्यू जारी, सुरक्षा पर उठे सवाल
सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई है। सात मौतों और कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका ने इलाके में चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ बचाव दल लगातार रेस्क्यू अभियान चला रहे हैं, वहीं पांच अधिकारियों के निलंबन से साफ है कि सरकार ने मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाया है। अब जांच के जरिए हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आने का इंतजार है।
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