Sukesh Chandrasekhar News : कथित महाठग सुकेश चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उसकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक आपराधिक मामले में सुकेश की दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसी फैसले के खिलाफ उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, यहां भी उसे राहत नहीं मिली। इस मामले में सुकेश की ओर से दलील दी गई थी कि निचली अदालत की कुछ टिप्पणियां उसके खिलाफ लंबित अन्य आपराधिक मुकदमों को प्रभावित कर सकती हैं।
ट्रायल कोर्ट ने बताया था आदतन अपराधी और शातिर ठग
दरअसल, सुकेश चंद्रशेखर ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट के फैसले में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों पर आपत्ति जताई थी। उसका कहना था कि अदालत ने दोषसिद्धि सुनाते समय उसे बार-बार ‘आदतन अपराधी’ और ‘शातिर ठग’ बताया है। सुकेश के मुताबिक, इन टिप्पणियों का असर उसके दूसरे आपराधिक मामलों की सुनवाई पर पड़ सकता है। उसने आशंका जताई कि अन्य अदालतों में इन टिप्पणियों को उसके खिलाफ नकारात्मक सामग्री के तौर पर देखा जा सकता है।

31 आपराधिक मुकदमों में सुनवाई लंबित होने का दिया हवाला
सुप्रीम कोर्ट में सुकेश चंद्रशेखर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि सुकेश के खिलाफ करीब 31 आपराधिक मामलों में अभी ट्रायल लंबित हैं। इन मामलों में अब तक दोषसिद्धि नहीं हुई है। ऐसे में एक मुकदमे में की गई प्रतिकूल टिप्पणियां बाकी मामलों की सुनवाई को प्रभावित कर सकती हैं। वकील ने अदालत से इस पहलू पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।

वकील ने कहा, साक्ष्यों से साबित नहीं होता आदतन अपराधी होना
सुनवाई के दौरान शोएब आलम ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में सुकेश को ‘सीजन्ड हैबिचुअल ऑफेंडर’ यानी पुराना आदतन अपराधी और ‘कॉनमैन’ यानी शातिर ठग बताया है। जबकि, उनके अनुसार, इस मामले में स्वीकार की गई स्थिति यह है कि अन्य किसी मुकदमे में उसे दोषी नहीं ठहराया गया है। वकील ने कहा कि मौजूदा मामले में पेश किए गए साक्ष्यों से भी इन टिप्पणियों को उचित ठहराने वाली कोई सामग्री सामने नहीं आती।
सुप्रीम कोर्ट ने वकील से पूछा, क्या दोषसिद्धि पर रोक चाहते हैं?
दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुकेश के वकील से स्पष्ट किया कि क्या वह दोषसिद्धि के आदेश के अमल पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। इस पर शोएब आलम ने कहा कि ऐसी राहत मांगने के पीछे ठोस आधार मौजूद हैं। उन्होंने दोहराया कि करीब 31 लंबित मुकदमों में इन टिप्पणियों के कारण सुकेश के प्रति पूर्वाग्रह पैदा होने की आशंका है।

दूसरे मुकदमों में निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित होने की आशंका
सुकेश के वकील ने यह भी तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों को दूसरे मामलों में उसके खराब चरित्र के साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। जबकि उन मुकदमों में अभी सुनवाई पूरी नहीं हुई है और अदालतों को उनके तथ्यों के आधार पर फैसला करना है। उनके मुताबिक, ऐसी टिप्पणियां निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत को प्रभावित कर सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, लंबित मुकदमों पर दिया स्पष्टीकरण
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सुकेश चंद्रशेखर की याचिका खारिज कर दी और उसे मांगी गई राहत नहीं दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके खिलाफ लंबित अन्य सभी आपराधिक मुकदमे कानून के अनुसार आगे बढ़ेंगे। प्रत्येक मामले का फैसला उसके अपने तथ्यों, साक्ष्यों और गुण-दोष के आधार पर किया जाएगा। यानी मौजूदा मामले की टिप्पणियां दूसरे मुकदमों के स्वतंत्र न्यायिक परीक्षण का विकल्प नहीं होंगी।


