SC Action Against BMC : मुंबई में BEST बस स्टैंड के लिए आरक्षित जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने अपने पुराने आदेशों का पालन नहीं करने पर नगर निगम आयुक्त को अवमानना का नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार और BMC को निर्देश दिया है कि जब तक अदालत के आदेशों का पालन नहीं होता, तब तक कमिश्नर और उनके निजी स्टाफ का मासिक वेतन जारी नहीं किया जाए। अदालत ने BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
बोरीवली में 5,800 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जे का मामला
यह पूरा मामला मुंबई के बोरीवली इलाके की लगभग 5,800 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है। इसमें से 3,400 वर्ग मीटर जमीन BEST बस स्टैंड और प्रशासनिक भवन के निर्माण के लिए आरक्षित है। आरोप है कि इस जमीन पर अतिक्रमण किया गया है, जिसके कारण सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी परियोजना का काम प्रभावित हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी दिया था अतिक्रमण हटाने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को BMC को निर्देश दिया था कि वह पराग कंस्ट्रक्शंस से जमीन का कब्जा लेकर अतिक्रमण हटाए और वहां बस स्टैंड का निर्माण पूरा कराए। इसके बाद 28 जुलाई 2026 को मामले की दोबारा सुनवाई हुई। उस दौरान अदालत ने नगर निगम को तीन महीने के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं होने पर अदालत ने अब सख्त कार्रवाई की है।

BMC ने मांगा अतिरिक्त समय, कोर्ट ने आवेदन किया खारिज
सुनवाई के दौरान BMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरपी भट्ट ने अदालत को बताया कि अतिक्रमण करने वालों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं। संबंधित लोगों को दो बार अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया है। अब उनके दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम आदेश पारित किया जाना बाकी है।
वकील ने यह भी दलील दी कि सिविल कोर्ट ने संबंधित लोगों को सुनवाई का अवसर दिए बिना बेदखल नहीं करने का निर्देश दिया है। इसी वजह से कार्रवाई में देरी हो रही है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम की अतिरिक्त समय मांगने वाली अर्जी खारिज कर दी।

मराठी दस्तावेजों के अनुवाद में देरी पर कोर्ट हैरान
सुनवाई के दौरान जस्टिस जोयमाल्या बागची ने सवाल उठाया कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में इतनी देरी क्यों हो रही है। BMC के हलफनामे में बताया गया था कि संबंधित अधिकारी को मराठी भाषा नहीं आती, इसलिए दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद कराने में समय लग रहा है। इस दलील पर न्यायाधीशों ने हैरानी जताई और देरी को लेकर सवाल किए।
‘क्या अधिकारी वसूल रहे हैं हफ्ता?’ कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। मुख्य न्यायाधीश ने आशंका जताई कि कहीं नगर निगम के अधिकारी अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत तो नहीं कर रहे। उन्होंने सवाल किया कि क्या अधिकारी उनसे हफ्ता या हर महीने पैसे वसूल रहे हैं? अदालत को आशंका है कि अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देकर कार्रवाई जानबूझकर टाली जा रही है।
कोर्ट ने दी जेल भेजने की चेतावनी
BMC के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि निगम अगले 30 दिनों में कार्रवाई पूरी कर देगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन की भी अतिरिक्त मोहलत देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों को जेल भेजा जा सकता है।
कमिश्नर को अवमानना नोटिस, 5 लाख रुपये का जुर्माना
अदालत ने BMC कमिश्नर को अवमानना नोटिस जारी करते हुए निगम पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। पीठ ने कहा कि कमिश्नर ने 13 नवंबर 2025 और 28 जुलाई 2026 के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है। साथ ही, आदेशों का पालन होने तक कमिश्नर और उनके निजी स्टाफ का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है। इस कार्रवाई से नगर निगम प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।
Read More : Ahmedabad Special Train 2026: दिवाली-छठ पर बिहार जाने वालों को राहत, अहमदाबाद से राजगीर के लिए स्पेशल ट्रेन

