Lula da Silva Victory : ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत को लेकर भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। AISA प्रमुख नेहा बोरा ने लूला की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ताकतवर लोग चाहें तो एक, दो या सौ गुलाब तोड़ सकते हैं, लेकिन वे वसंत के आगमन को नहीं रोक सकते। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए उम्मीद जताई कि भारत में भी बदलाव की नई लहर आएगी। नेहा बोरा ने कहा कि भारत वसंत का इंतजार कर रहा है और इसके लिए तैयारी भी कर रहा है।

लूला की जीत को लेकर वामपंथी नेताओं में उत्साह
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत के बाद भारतीय वामपंथी दलों के नेताओं ने उन्हें बधाई दी। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को नेताओं ने कहा कि लूला की जीत श्रमिक अधिकारों, जन आंदोलनों और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने वालों को नई उम्मीद देती है। उनके मुताबिक, यह परिणाम इस बात का संदेश है कि जनता की एकजुटता राजनीतिक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

चौथी बार राष्ट्रपति बनने पर लूला को बधाई
दी गई जानकारी के अनुसार, लूला दा सिल्वा ने अक्टूबर 2026 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल कर चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बनने का रास्ता बनाया। उन्होंने लिबरल पार्टी के दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को मामूली अंतर से हराया। हालांकि, बोल्सोनारो ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए उन्हें समझ से परे बताया। इस प्रतिक्रिया के बाद चुनावी नतीजों को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हुई है।
CPM महासचिव एमए बेबी ने बताया ऐतिहासिक जीत
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPM के महासचिव एमए बेबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लूला और ब्राजील की जनता को बधाई दी। उन्होंने लूला के चौथे राष्ट्रपति कार्यकाल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि उनकी जीत भारत के युवाओं में भी उत्साह भर सकती है। बेबी ने भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जारी प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया।
एकजुटता से नफरत की राजनीति को हराने का संदेश
एमए बेबी ने कहा कि लूला के चुनाव अभियान ने दिखाया कि जब लोग एकजुट होकर आगे बढ़ते हैं, तो नफरत और विभाजन पर आधारित राजनीति को चुनौती दी जा सकती है। उनके बयान को भारत में जारी राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। वामपंथी नेताओं का मानना है कि ब्राजील का चुनाव परिणाम श्रमिकों और आम लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे समूहों को प्रेरणा दे सकता है।

दीपांकर भट्टाचार्य ने भी दी बधाई
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने भी लूला को जीत की बधाई दी। उन्होंने दावा किया कि ब्राजील की जनता ने अमेरिका समर्थित धुर दक्षिणपंथी राजनीति को पराजित किया है। भट्टाचार्य ने सर्बिया के राजनीतिक घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, वहां लंबे समय से सत्ता में रहे अलेक्जेंडर वुचिच ने छात्र-नेतृत्व वाले विपक्षी आंदोलन के सामने रविवार को हार स्वीकार की। इन प्रतिक्रियाओं के बीच लूला की जीत को वामपंथी दल जन आंदोलनों और राजनीतिक बदलाव की उम्मीद के रूप में पेश कर रहे हैं।

