US Iran Conflict : ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तेहरान ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग दोबारा खुल सकता है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को ईरान की सात शर्तें माननी होंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में दोबारा हमला करने या किसी तरह का सैन्य दुस्साहस दिखाने की कोशिश की गई, तो इसे फिर से खोलना मुश्किल हो जाएगा।
ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं सात शर्तें
अकरमिनिया के बयान के मुताबिक, ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके खिलाफ लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध समाप्त करे। इसके अलावा दूसरे देशों के बैंकों में जमा ईरान की रोकी गई संपत्तियां वापस की जाएं। तेहरान ने युद्ध के दौरान अपने सैन्य ठिकानों, बुनियादी ढांचे और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई की मांग भी रखी है।

ईरान की अन्य शर्तों में बंदरगाहों और समुद्री व्यापार पर लगी रोक हटाना, तेल कारोबार से जुड़ी पाबंदियां खत्म करना और ईरान के साथ-साथ क्षेत्र में उसके सहयोगी संगठनों के खिलाफ अमेरिका तथा इजरायल की सैन्य कार्रवाई रोकना शामिल है। इसके अलावा ईरान चाहता है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करे।

सुप्रीम लीडर ने सेना को दिए रणनीतिक निर्देश
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई और वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के बीच हुई हालिया बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों और सशस्त्र बलों की तैयारियों को लेकर कई रणनीतिक निर्देश दिए गए।
अकरमिनिया के अनुसार, सेना को हर परिस्थिति में उच्च स्तर की युद्ध-तैयारी बनाए रखने और किसी भी संभावित आक्रामक कार्रवाई का तुरंत जवाब देने के निर्देश मिले हैं। उन्होंने कहा कि ईरान का जवाब ऐसा प्रभावी होना चाहिए, जिससे विरोधी पक्ष भविष्य में हमला करने या दुस्साहस दिखाने से पहले कई बार सोचे।

अमेरिका के सैन्य ठिकाने भी ईरान के निशाने पर?
अकरमिनिया ने अमेरिका की पश्चिम एशिया से बाहर मौजूद सैन्य ताकत का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य अड्डे और सेनाएं दुनिया के दूसरे क्षेत्रों में भी तैनात हैं। उनके मुताबिक, यदि ईरान पर हमला होता है, तो उसकी सेना अमेरिकी संपत्तियों और संसाधनों को संभावित लक्ष्य मान सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसी स्थिति में ईरान की जवाबी कार्रवाई किसी भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं होगी।
परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के संकेत
इस बीच ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की इच्छा भी जताई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कुछ रियायतों पर विचार कर सकता है। यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत से जुड़े एक राजनयिक ने बताया कि ईरान कतर की ओर से पेश किए गए परमाणु गतिविधियों से संबंधित प्रस्तावों पर विचार कर रहा है। कतर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अधिक पारदर्शिता दिखाने पर सहमत होता है, तो इससे शांति वार्ता दोबारा शुरू करने का रास्ता खुल सकता है।
क्या सात शर्तों से निकलेगा युद्ध का रास्ता?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस मार्ग को लेकर ईरान की चेतावनी और अमेरिका के सामने रखी गई शर्तें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा सकती हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच बातचीत किसी ठोस समझौते तक पहुंचेगी या नहीं, यह आने वाले कूटनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा। फिलहाल ईरान की सात मांगें और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के संकेत इस तनाव के बीच अहम मुद्दे बने हुए हैं।
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