Sonia Gandhi Book Controversy : कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की आगामी किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ (Belonging: A Journey of Love) के कुछ अहम अंश सामने आने के बाद देश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। किताब में वर्ष 1975 से 1977 के बीच लागू रहे आपातकाल और उस दौरान गांधी परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर किए गए उल्लेख चर्चा का विषय बन गए हैं। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इन बयानों पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांग्रेस और गांधी परिवार पर निशाना साधा है।
निशिकांत दुबे ने संजय और राजीव गांधी को लेकर कसा तंज
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में सवाल किया कि क्या सोनिया गांधी की किताब में आपातकाल के लिए संजय गांधी को जिम्मेदार बताया जा रहा है, जबकि राजीव गांधी को इसके विरोध में खड़ा किया जा रहा है? उन्होंने लिखा कि किताब से ऐसा संकेत मिलता है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे ही उस समय शासन से जुड़े फैसलों को प्रभावित कर रहे थे।दुबे ने यह भी सवाल उठाया कि जब संजय गांधी और राजीव गांधी अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो इन दावों और घटनाओं पर जवाब कौन देगा? अपनी पोस्ट में उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, “संजय गांधी जी आपातकाल के विलेन और राजीव जी देवता?” उनके इस बयान के बाद किताब को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।

10 नवंबर को प्रकाशित होगी सोनिया गांधी की किताब
सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है। किताब के प्रकाशन से पहले सोनिया गांधी ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में इसके कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। इसी बातचीत में उन्होंने आपातकाल के फैसले को एक बड़ी गलती बताया।सोनिया गांधी के मुताबिक, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मूल रूप से लोकतांत्रिक सोच रखती थीं और आपातकाल के दौरान वह खुद भी सहज महसूस नहीं कर रही थीं। उन्होंने बताया कि आपातकाल लागू करने के फैसले को लेकर परिवार के भीतर भी मतभेद मौजूद थे। उनके अनुसार, राजीव गांधी इस फैसले के समर्थन में नहीं थे और उन्होंने इंदिरा गांधी को अगले चुनाव तक इंतजार करने की सलाह दी थी।

संजय गांधी आपातकाल लागू करने के पक्ष में क्यों थे?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनिया गांधी ने अपनी किताब में परिवार के साथ हुई एक डिनर बातचीत का भी जिक्र किया है। उनके अनुसार, उस बातचीत में संजय गांधी ने आशंका जताई थी कि विपक्ष इंदिरा गांधी को राजनीतिक रूप से खत्म कर देगा। इसलिए उन्होंने विपक्ष को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत बताई थी।सोनिया गांधी के विवरण के मुताबिक, संजय गांधी आपातकाल लागू करने के पक्ष में थे, जबकि राजीव गांधी इस फैसले से सहमत नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संजय गांधी को नियंत्रण में रखा गया होता, तो आपातकाल के दौरान और उसके बाद हुए कई नुकसान को रोका जा सकता था।
आपातकाल के दौर की घटनाएं फिर चर्चा में
भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक आपातकाल लागू रहा था। इस अवधि में नागरिक स्वतंत्रताओं पर पाबंदियां लगीं, विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल उठे। आपातकाल भारतीय राजनीति के सबसे विवादित दौर में गिना जाता है।

इंदिरा गांधी की जिम्मेदारी पर भी उठे सवाल
निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया का एक प्रमुख सवाल यह भी है कि यदि आपातकाल लागू कराने में संजय गांधी की इतनी अहम भूमिका थी, तो उस समय प्रधानमंत्री के पद पर मौजूद इंदिरा गांधी की जिम्मेदारी को किस तरह देखा जाना चाहिए? सोनिया गांधी की किताब के सामने आए विवरणों ने एक बार फिर गांधी परिवार की भूमिका और आपातकाल के ऐतिहासिक फैसले पर बहस को हवा दे दी है। किताब के प्रकाशन के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।
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