CJP Protest : दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। शनिवार को उनके पद छोड़ने की घोषणा के बाद आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई। प्रदर्शनकारियों ने इसे लंबे समय से चल रहे आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बताया। जंतर-मंतर पर नारेबाजी, तालियों और जश्न का माहौल देखने को मिला। आंदोलनकारियों का कहना था कि यह केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि छात्रों की एकजुटता और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत है।

सीजेपी ने अपडेट किया अपना डिमांड रोस्टर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर डिमांड रोस्टर अपडेट करने की जानकारी साझा की। पार्टी ने पोस्ट में कहा कि उनकी एक प्रमुख मांग पूरी हो चुकी है, क्योंकि शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है और तीन अहम मांगें अब भी सरकार के सामने लंबित हैं। सीजेपी ने कहा कि इन मांगों के पूरा होने तक आंदोलन की दिशा और रणनीति जारी रहेगी।

तीन प्रमुख मांगों पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी
सीजेपी ने अपने बयान में तीन नई प्राथमिक मांगों को दोहराया। पहली मांग यह है कि कथित परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। दूसरी मांग है कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई न की जाए। तीसरी मांग के तहत रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और दिल्ली पुलिस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है। पार्टी का कहना है कि इन तीनों मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना चाहिए।
‘देश अभी बाकी मांगों का इंतजार कर रहा है’
सीजेपी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। संगठन के अनुसार, देशभर के छात्र अब सरकार से बाकी मांगों के पूरा होने की उम्मीद कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि जब तक लंबित मुद्दों पर समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन की भावना और उद्देश्य बरकरार रहेंगे। संगठन ने इसे छात्रों के अधिकारों और न्याय की लड़ाई बताया।
प्रधानमंत्री को भेजा गया इस्तीफा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं ने उन्हें भीतर तक दुखी किया है। उन्होंने कहा कि यह मामला उनके व्यक्तिगत सम्मान का नहीं, बल्कि देश के छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का है। उन्होंने अपने निर्णय को नैतिक जिम्मेदारी से जुड़ा कदम बताया।
छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देने की बात
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी इससे पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जो माहौल बना है, उसका फायदा कोई राष्ट्र विरोधी तत्व न उठा सके, यह सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य यह है कि किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी विवादों में न फंसे और युवा अपना पूरा ध्यान पढ़ाई तथा करियर निर्माण पर केंद्रित कर सकें। इसी सोच के साथ उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला लिया।
अभिजीत दीपके ने आंदोलन को बताया लोकतंत्र की जीत
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे आंदोलन की सफलता बताया। उन्होंने कहा कि कई लोगों का मानना था कि सरकार में मंत्री इस्तीफा नहीं देते, लेकिन शांतिपूर्ण और लगातार चले आंदोलन ने यह धारणा बदल दी। दीपके ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे बड़ी होती है और यदि लोग संगठित होकर अपनी बात रखते हैं तो सरकार को भी झुकना पड़ता है।
‘झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए’
अभिजीत दीपके ने अपने संबोधन में कहा कि आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने पर परिणाम जरूर मिलते हैं। उन्होंने कहा कि डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा आंदोलन की पहली सफलता है, लेकिन शेष मांगों को पूरा कराना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि जब तक सभी लंबित मांगों पर सरकार सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
Read More : CJP Protest: धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे पर जंतर-मंतर पर दिखा जश्न , अभिजीत दीपके बोले -‘झुकती है दुनिया…’











