Prajwal Revanna Conviction : जेडीएस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना को शनिवार को स्पेशल कोर्ट ने नौकरानी से रेप के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही उन पर 11.50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अब वह बेंगलुरु सेंट्रल जेल में कैदी नंबर 15528 के तौर पर बंद हैं। सजा के बाद रेवन्ना ने जेल में अपनी पहली रात कड़ी निगरानी में गुजारी।

मेडिकल चेकअप के दौरान टूटा हौसला
जेल प्रशासन के अनुसार, कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद प्रज्वल रेवन्ना का शाम को मेडिकल परीक्षण कराया गया। इस दौरान वह लगातार रोता रहा लेकिन किसी से कोई बातचीत नहीं की। इसके बाद उसे जेल लाया गया और विशेष सुरक्षा व्यवस्था में रखा गया।

विशेष कोर्ट ने दोषी ठहराकर सुनाई उम्रकैद की सजा
बेंगलुरु की सांसदों और विधायकों के मामलों की विशेष अदालत ने शुक्रवार को रेवन्ना को दोषी ठहराया था। शनिवार को जज संतोष गजानन भट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि में से 11.25 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि अपराध गंभीर है और इसमें कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।
2021 से हो रहा था यौन शोषण
पीड़िता, जो रेवन्ना के परिवार के फार्महाउस में नौकरानी के रूप में काम करती थी, ने अप्रैल 2024 में FIR दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि 2021 से रेवन्ना ने कई बार उसका रेप किया और किसी को बताने पर वीडियो लीक करने की धमकी दी। कोर्ट ने मामले में IPC की कई धाराओं जैसे रेप, ताक-झांक, आपराधिक धमकी और अश्लील वीडियो लीक करने के तहत मुकदमा चलाया।
पहला केस जिसमें दोषी ठहराया गया
प्रज्वल रेवन्ना पर कुल चार अलग-अलग FIR दर्ज हैं, जिनमें रेप, छेड़छाड़, धमकी और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। यह पहला मामला है जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया है। बाकी मामलों की जांच अभी भी चल रही है। पीड़ित महिलाओं की संख्या 50 से ज्यादा बताई जा रही है।
2000 से ज्यादा अश्लील वीडियो सामने आए
2023 में प्रज्वल रेवन्ना का नाम कर्नाटक सेक्स स्कैंडल में सामने आया था। सोशल मीडिया पर उनके 2,000 से ज्यादा अश्लील वीडियो वायरल हुए थे। इसके बाद उन्हें जनता दल सेक्युलर (JDS) से निलंबित कर दिया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने हासन सीट से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। यह मामला कर्नाटक की राजनीति में भूचाल लाने वाला है और एक बार फिर नेताओं की जवाबदेही और नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।










