Jharkhand Maoist Attack : झारखंड में माओवादियों ने रविवार सुबह एक बड़ा हमला करते हुए रेलवे ट्रैक को आईईडी विस्फोट से उड़ा दिया। घटना चक्रधरपुर मंडल के रंगरा-करमपारा रूट पर हुई। जिस समय धमाका हुआ, उस वक्त ट्रैक पर कोई ट्रेन नहीं थी, जिससे एक बड़ी त्रासदी टल गई। हालांकि, घटना ने 2010 के जनेश्वरी कांड की भयावह यादें ताज़ा कर दी हैं।

सुबह 6:40 बजे हुआ धमाका
रविवार सुबह करीब 6:40 बजे ट्रैक पर जोरदार धमाका हुआ, जिससे रेलवे लाइन के स्लीपर टूट गए और ट्रैक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही आरपीएफ, झारखंड पुलिस और ओडिशा पुलिस के जवान मौके पर पहुंच गए। घटनास्थल से माओवादी बैनर और झंडे भी बरामद हुए हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह हमला नक्सलियों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से किया गया था।

संयुक्त सुरक्षा बलों की जांच शुरू
घटना के तुरंत बाद, क्षेत्र को घेरकर तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया। बम निरोधक दस्ता यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि आसपास कहीं और विस्फोटक न लगाए गए हों। सुरक्षा एजेंसियों ने रेल ट्रैक की मरम्मत शुरू कर दी है और क्षेत्र में सघन गश्त बढ़ा दी गई है। झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ, ओडिशा पुलिस और आरपीएफ की टीमें मिलकर मामले की जांच में जुटी हैं।
माओवादी मना रहे ‘शहीदी सप्ताह’
सूत्रों के मुताबिक, माओवादियों के शीर्ष कमांडर बसवराज उर्फ नंबाला केशवराव की मौत के विरोध में माओवादी संगठन 28 जुलाई से 3 अगस्त तक ‘शहीदी सप्ताह’ मना रहा है। 3 अगस्त को शहादत सप्ताह के अंतिम दिन बंद बुलाया गया था। इस दौरान नक्सलियों ने कई राज्यों में हिंसात्मक गतिविधियों की चेतावनी दी थी। झारखंड, बिहार, उत्तरी छत्तीसगढ़, बंगाल और असम में इस बंद का असर देखा गया।
2010 की ज्ञानेश्वरी त्रासदी से जुड़ी आशंकाएं फिर सतह पर
इस हमले के बाद, सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता में 2010 की ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस त्रासदी जैसी आशंकाएं उभरने लगी हैं। पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर में माओवादियों ने ट्रेन ट्रैक पर विस्फोट कर ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस को पटरी से उतार दिया था, जिसमें 141 यात्रियों की मौत हुई थी। मौजूदा हमला उसी पैटर्न पर किया गया, जिससे यह अंदेशा गहराने लगा है कि माओवादी फिर से बड़े पैमाने पर हिंसा की तैयारी में हैं।
रक्षाबंधन की खुशियों के बीच दहशत का माहौल
रविवार को जहां एक ओर देश भर में रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा था, वहीं इस हमले ने झारखंड में डर का माहौल पैदा कर दिया। लोग यह सोचकर सहम गए कि अगर उस समय कोई ट्रेन गुजर रही होती, तो क्या होता। रेलवे विभाग ने सभी संबंधित रूटों पर सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी है।
इस हमले ने एक बार फिर नक्सली खतरे को उजागर किया है। हालाँकि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना भविष्य के लिए चेतावनी है कि माओवादी गतिविधियाँ अभी भी गंभीर खतरा बनी हुई हैं।
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