1971 India Pakistan war : रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और भारत के बीच बढ़ती कूटनीतिक खींचतान के बीच भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने अमेरिका को उसके 1971 के इतिहास का आईना दिखाया है। पूर्वी कमान ने 5 अगस्त को अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल से एक ऐतिहासिक दस्तावेज साझा करते हुए बताया कि कैसे अमेरिका ने पाकिस्तान को बांग्लादेश में नरसंहार के दौरान हथियारों से समर्थन दिया था।

5 अगस्त 1971: जब अमेरिका ने नरसंहार के लिए दिए थे हथियार
सेना द्वारा साझा की गई रिपोर्ट के अनुसार, 5 अगस्त 1971 को अमेरिका ने पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर के हथियार दिए थे, जबकि उस वक्त पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में नरसंहार, बलात्कार और मानवाधिकार उल्लंघन चरम पर था। इस रिपोर्ट में तत्कालीन रक्षा मंत्री विद्याचरण शुक्ल के राज्यसभा में दिए गए बयान का हवाला भी है, जिसमें पाकिस्तान को अमेरिका और चीन से मिले समर्थन की बात कही गई थी।

भारतीय सेना का इतिहासिक स्मरण, ट्रंप के आरोपों की पृष्ठभूमि में अहम
यह पोस्ट ऐसे समय आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर आरोप लगाए हैं कि वह रूस से तेल खरीदकर परोक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है। ट्रंप ने कहा था कि भारत सस्ता रूसी तेल खरीदकर उसे खुले बाज़ार में बेच रहा है और मुनाफा कमा रहा है।
ट्रंप के अनुसार, भारत के इस रवैये को देखते हुए अमेरिका को भारत पर और अधिक टैरिफ लगाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत, रूस का “दोस्त” बनकर यूक्रेन को मौत की ओर धकेल रहा है।
भारत ने दी स्पष्ट प्रतिक्रिया: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है और उसकी विदेश नीति स्वतंत्र और संतुलित है। भारत कई बार कह चुका है कि वह ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से किसी भी देश से तेल खरीद सकता है।
1971 का सच: जब अमेरिका बना था नरसंहार का मूक समर्थक
सेना के पोस्ट ने दुनिया को याद दिलाया कि जब पाकिस्तान की सेना ने बांग्लादेश में 30 लाख लोगों की हत्या और 4 लाख से ज्यादा महिलाओं के साथ बलात्कार किया, तब अमेरिका ने उसे समर्थन दिया। भारत को तब अकेले ही इस मानवता विरोधी हिंसा का मुकाबला करना पड़ा था।
कूटनीतिक संदेश: आज के भारत को न सिखाएं मानवाधिकार
भारतीय सेना के इस पोस्ट को ट्रंप के हालिया बयान के जवाबी संकेत के रूप में देखा जा रहा है। सेना ने अतीत की तस्वीरें दिखाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि आज भारत को नैतिकता और मानवाधिकार पर उपदेश देने से पहले अमेरिका को अपना इतिहास देखना चाहिए।










