Owaisi on Trump tariffs : अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% तक के टैरिफ को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा हमला बोला है और केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया है। ओवैसी ने कहा है कि अमेरिका खुलेआम भारत पर अपनी धौंस जमा रहा है, और भारत की चुप्पी उसकी कूटनीतिक विफलता का प्रमाण है।

अमेरिका की धमकी या व्यापार नीति?
ओवैसी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका यह समझने में असमर्थ है कि वैश्विक व्यापार कैसे काम करता है। “हमने रूस से तेल खरीदा, इसलिए अमेरिका ने बदले में भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगा दिया। यह सीधा व्यापारिक ‘प्रतिशोध’ है,” उन्होंने कहा। गौरतलब है कि ट्रंप ने 7 अगस्त से 25% और 27 अगस्त से अतिरिक्त 25% टैरिफ लागू करने की घोषणा की है, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच जाएगा।

पीएम मोदी आखिर चुप क्यों हैं?
ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या जब अमेरिका पूरे 56% टैरिफ लगाएगा, तभी प्रधानमंत्री अपना 56 इंच का सीना दिखाएंगे?” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर चुप्पी साधे हुए है क्योंकि इस फैसले से उनके ‘धनी मित्रों’ को कोई नुकसान नहीं हो रहा, जबकि छोटे व्यवसाय, निर्यातक और मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
“सरकार की नाकामी का नतीजा”
ओवैसी ने कहा कि यह टैरिफ सरकार की विदेश नीति की विफलता का परिणाम है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। “छोटे व्यापारियों और निर्यातकों पर यह बोझ भारी पड़ेगा। नौकरियां जाएंगी और भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर भी असर पड़ेगा।”
विपक्ष भी हमलावर
ओवैसी के अलावा शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी केंद्र की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “भारत को एक तरफ चीन का बहिष्कार करने को कहा गया, लेकिन उसी चीन से सरकार ने व्यापार और यात्राओं की अनुमति दी। अब अमेरिका से भी झटका मिल रहा है। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।”
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से भारत के घरेलू राजनीति में नए सिरे से बहस छिड़ गई है। ओवैसी और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार अमेरिका की धमकी का जवाब देने में असफल रही है। वहीं, जनता की निगाहें अब प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्रालय की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
रिपोर्ट: डिजिटल डेस्क









