Rahul Gandhi on affidavit: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट पर गड़बड़ी के राहुल गांधी के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने उनसे इस बारे में हलफनामा मांगा है। जवाब में राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, “मैं जो कहता हूं, वही मेरा वचन है, वही मेरा हलफनामा है।”

बेंगलुरु सेंट्रल सीट पर राहुल के गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की टीम ने बेंगलुरु सेंट्रल सीट के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का गहन विश्लेषण किया है। उन्होंने दावा किया कि इस सीट पर बीजेपी को एकतरफा वोट मिला, जबकि आसपास की छह अन्य विधानसभा सीटों पर बीजेपी पिछड़ रही थी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महादेवपुरा क्षेत्र में करीब 1,00,250 वोटों की “चोरी” हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि एक ही पते पर 50-50 मतदाता दर्ज थे, और कई मामलों में एक ही नाम के साथ अलग-अलग फोटो वाले मतदाता मौजूद थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब “एक व्यक्ति, एक वोट” का संवैधानिक सिद्धांत ही खतरे में पड़ जाए, तो लोकतंत्र की नींव पर क्या असर पड़ेगा?
“सिर्फ डेटा दिखा रहे हैं”
राहुल गांधी ने कहा, “हमने जो कहा है, वह कोई मनगढ़ंत बात नहीं है। यह चुनाव आयोग के सार्वजनिक डेटा पर आधारित है। हमने जो विश्लेषण किया, उसी को जनता के सामने रखा है। अगर चुनाव आयोग इस पर कार्रवाई नहीं करता, तो यह उसकी जवाबदेही पर सवाल उठाता है।”
चुनाव आयोग की सख्ती
राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने उन्हें शुक्रवार 1 से 3 बजे के बीच मिलने का समय दिया है और उनसे एक विधिवत शपथपत्र मांगा है, जिसमें वह स्पष्ट करें कि किन मतदाताओं के नाम फर्जी हैं और किनका नाम अवैध रूप से हटाया गया है।
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के बयानों को “भ्रामक, तथ्यहीन और धमकी भरा” बताया है और चेतावनी दी है कि यदि दिए गए तथ्यों में गलती पाई गई, तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
लोकतंत्र पर चिंता, सर्वे बनाम नतीजों पर सवाल
प्रेस वार्ता में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार के खिलाफ जनता में असंतोष के बावजूद बीजेपी को नुकसान नहीं होता दिख रहा है। उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों में चुनाव पूर्व सर्वेक्षण और नतीजों के बीच के अंतर का हवाला देते हुए चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए।
राहुल गांधी का रुख साफ है-वो चुनाव आयोग की निष्पक्षता को चुनौती देने से पीछे नहीं हटेंगे। जबकि चुनाव आयोग ने साक्ष्यों की मांग कर दी है, यह देखना अहम होगा कि शुक्रवार को कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल क्या दस्तावेज़ पेश करता है और आयोग का अगला कदम क्या होता है। लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
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