Ram Mandir Donation Probe: SIT करेगी ट्रस्ट के 5 साल के खातों का री-ऑडिट, सोना-चांदी की भी जांच

Ram Mandir Donation Probe:  अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान के नाम पर हुए कथित वित्तीय गबन के मामले में जांच का दायरा अब काफी बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय खातों का फिर से विस्तृत ऑडिट करने का निर्णय लिया है। प्रारंभिक जांच में भारी वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद एसआईटी ने यह कदम उठाया है। सूत्रों के अनुसार, इस पुन: ऑडिट में निर्माण कार्यों पर हुए व्यय के साथ-साथ मंदिर को दान में प्राप्त सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का विस्तृत विवरण शामिल किया जाएगा।

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मुख्य आरोपी से पूछताछ और गिरफ़्तारियों का सिलसिला

इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ शुरू कर दी है। शुक्ला, जो दान की गणना की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल था, को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। स्थानीय अदालत ने उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जहाँ से जांच एजेंसियां गबन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग जुटा रही हैं। शुक्ला के पास से अब तक की जांच में सर्वाधिक नकद राशि बरामद हुई है। इसके अलावा, एसआईटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और मंदिर प्रबंधन से जुड़े गोपाल राव से भी गहन पूछताछ की है।

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ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों का इस्तीफा

जांच के बीच एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। छह जुलाई को ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें इन इस्तीफों पर विचार किया जाएगा और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। पुलिस सूत्रों ने बरामद नकद राशि का ब्योरा देते हुए बताया कि अविनाश शुक्ला से 20.39 लाख, करुणेश पांडे से 18.07 लाख, अनुकल्प मिश्रा से 16.82 लाख, लवकुश मिश्रा से 14.25 लाख, रमाशंकर मिश्रा से 7.32 लाख और रमाशंकर यादव से एक लाख रुपये बरामद किए गए हैं।

बरामदगी और संदिग्ध दान बॉक्स का भंडाफोड़

एसआईटी ने जांच के दौरान नकद के अलावा 11 ग्राम सोना, 375 ग्राम चांदी और 1,121 अमेरिकी डॉलर भी जब्त किए हैं। जांचकर्ताओं ने अयोध्या के एक योग केंद्र से एक संदिग्ध दान बॉक्स भी बरामद किया है, जिस पर ‘रामराज्य कोष’ का लेबल लगा था और उस पर पेटीएम क्यूआर कोड अंकित था। कथित तौर पर मुख्य आरोपी शुक्ला पिछले एक दशक से इसी योग केंद्र में रह रहा था।

बागेश्वर धाम प्रमुख की प्रतिक्रिया और जांच पर भरोसा

इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए बागेश्वर धाम के प्रमुख आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जांच प्रक्रिया पर पूर्ण विश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि दोषियों को उनके किए की सजा अवश्य मिलेगी। उन्होंने इसे ‘छलयुग’ करार देते हुए कहा कि मंदिरों और मठों को एक सोची-समझी साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कानून व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए स्पष्ट किया कि जो भी इस पाप में शामिल है, उसे कानून और ईश्वर दोनों की सजा भुगतनी पड़ेगी। उल्लेखनीय है कि इस घोटाले का मामला 7 जून को प्रकाश में आया था और अब तक कुल आठ लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

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Chandan Das

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