Kubereswar Dham tragedy: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले स्थित कुबेरेश्वर धाम में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान बीते तीन दिनों में 6 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इस दुखद घटनाक्रम ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है बल्कि अब मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग ने भी इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है।

मृतकों की पहचान और विवाद
चतुर सिंह (50), निवासी: पांचवेल, गुजरात , ईश्वर सिंह (65), निवासी: रोहतक, हरियाणा, दिलीप सिंह (57), निवासी: रायपुर, छत्तीसगढ़, जसवंती बेन (56), निवासी: ओम नगर, राजकोट, गुजरात, संगीता गुप्ता (48), निवासी: फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश,उपेंद्र गुप्ता (22), निवासी: गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, मृतकों की आयु और भौगोलिक विविधता इस आयोजन में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की व्यापक भागीदारी को दर्शाती है। हालांकि, इन मौतों के कारणों को लेकर अब तक कोई स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस इसे ‘स्वाभाविक मौत’ बताकर टालने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रशासन की चुप्पी और आक्रोश
अब तक किसी भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी या आयोजक मंडल की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। न ही कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा, जिनके नेतृत्व में यह आयोजन हो रहा था, या उनकी समिति ने इन मौतों पर कोई प्रतिक्रिया दी है। स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यह मौतें प्रशासनिक लापरवाही, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और अत्यधिक भीड़ की वजह से हुई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम न होने की बात अब मुखर रूप से उठाई जा रही है। कुबेरेश्वर धाम के आयोजक और कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा समय-समय पर भीड़ और अव्यवस्था को लेकर विवादों में घिरे रहे हैं।
2024 में मेरठ में भगदड़ की स्थिति बनी थी
2025 में जशपुर (छत्तीसगढ़) में उनकी कथा में जा रहे श्रद्धालुओं की पिकअप वाहन पलटने से 35 लोग घायल हो गए थे। उन पर आरोप लगते रहे हैं कि उनके आयोजनों में प्रशिक्षित बाउंसरों की जगह निजी ‘गुंडों’ का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, उनके कुछ बयान भी सामाजिक विवाद खड़े कर चुके हैं। इसके बावजूद, मिश्रा की लोकप्रियता में कोई खास गिरावट नहीं आई है। देशभर से लाखों श्रद्धालु उनके आयोजनों में भाग लेते हैं।
आयोग की कार्रवाई और आगे की राह
मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग ने इन मौतों को गंभीर मामला मानते हुए जांच रिपोर्ट तलब की है। यह देखना अब महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन जिम्मेदारी तय करता है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा और व्यवस्था संबंधी सुधार करता है।कुबेरेश्वर धाम की घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही और धार्मिक आयोजनों की अनियंत्रित भीड़ प्रबंधन पर गहरे सवाल खड़े करती हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा यह विषय किसी एक व्यक्ति की जवाबदेही से परे, पूरे तंत्र की परीक्षा है।











