Assam immigration issue: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में फैले भ्रम को दूर करते हुए साफ कर दिया है कि अवैध घुसपैठ के आरोप में केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि गैर-मुस्लिम घुसपैठियों पर भी मुक़दमा दर्ज किया जाएगा। इससे पहले यह धारणा बनी थी कि केवल मुस्लिम घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, लेकिन मुख्यमंत्री ने इस भ्रम को खारिज किया है और संविधान तथा नागरिकता कानून के दायरे में सभी के लिए समान नियम लागू होने की बात कही है।

असम और भाजपा शासित अन्य राज्यों में अवैध घुसपैठ की रोकथाम के लिए चल रही कार्रवाईयों में कई बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया है। असम में ये गिरफ़्तारियाँ अन्य राज्यों की तुलना में अधिक संख्या में हो रही हैं। असम सरकार का विदेशी न्यायाधिकरण ही यह तय करता है कि पकड़ा गया व्यक्ति विदेशी है या नहीं। ऐसे मामलों में केवल विदेशी साबित होने पर मुक़दमा चलाया जाता है।

हाल ही में, समाचार एजेंसी पीटीआई ने एक सरकारी निर्देश-पत्र के हवाले से खबर दी थी कि असम सरकार ने गैर-मुस्लिम विदेशी घुसपैठियों के खिलाफ मुक़दमा दर्ज नहीं करने का निर्णय लिया है और केवल मुस्लिम घुसपैठियों को ही निशाना बनाया जाएगा। इस रिपोर्ट ने राज्य में व्यापक विवाद और विरोध को जन्म दिया। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आस्सू) सहित कई स्थानीय संगठन भाजपा सरकार पर असम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए राज्य बंद का आह्वान कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन आरोपों और भ्रमों का खंडन करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है और पीटीआई द्वारा प्रकाशित निर्देश-पत्र गलत और बिना अनुमति का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के मौजूदा नियमों के अलावा कोई नया निर्देश जारी नहीं किया है। यदि कैबिनेट स्तर पर कोई फैसला लिया जाएगा तो जनता को अवगत कराया जाएगा।
सीएए के तहत, जिन गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को धार्मिक उत्पीड़न के कारण 2014 से पहले भारत में प्रवेश मिला है, उन्हें पहले से ही संरक्षण दिया गया है। इसलिए, सीएए के दायरे में आने वाले इन गैर-मुस्लिमों को अलग से कोई कानून बनाने की आवश्यकता नहीं है। वहीं, 2014 के बाद भारत आए गैर-मुस्लिम अवैध घुसपैठियों पर भी वैसा ही कार्रवाई की जाएगी जैसा मुस्लिम घुसपैठियों के मामले में होती है। मुख्यमंत्री ने इस बात को चतुराई से स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए समान है और किसी भी समूह के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
असम में अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक संवेदनाएं बेहद तीव्र हैं। प्रदेश की सीमाएं विशेष रूप से बांग्लादेश से लगती हैं, जिससे घुसपैठ की समस्या वर्षों से जारी है। इस संदर्भ में असम सरकार की सख्ती को स्थानीय जनता में समर्थन भी प्राप्त है। वहीं, हाल की गलतफहमियों और अफवाहों से उत्पन्न विवाद ने राजनीतिक तनाव को बढ़ावा दिया।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की इस सफाई से स्पष्ट हो गया है कि अवैध घुसपैठ पर कानून के तहत कार्रवाई में धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। यह फैसला असम की कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस प्रकार, असम सरकार ने सभी गैरकानूनी आव्रजकों के खिलाफ कार्रवाई को सुनिश्चित करते हुए राजनीतिक विवाद और सामाजिक भ्रम को समाप्त करने की कोशिश की है। आगे भी इस विषय पर सूचनाओं और आदेशों के लिए सरकार के आधिकारिक बयानों पर ध्यान दिया जाएगा।
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