Mitanin strike Chhattisgarh :छत्तीसगढ़ की 72 हजार मितानिनों ने अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर 7 अगस्त से राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को धरना स्थल पहुंचे और मितानिनों के संघर्ष को ‘न्यायसंगत’ बताते हुए भाजपा सरकार पर वादा-खिलाफी का आरोप लगाया।

मितानिनों की तीन मुख्य मांगे
NHM (नेशनल हेल्थ मिशन) में स्थायी संविलियन

मासिक मानदेय में 50 प्रतिशत की वृद्धि
NGO के माध्यम से कार्य कराने की प्रक्रिया समाप्त की जाए
धरने में शामिल मितानिनों ने साफ कर दिया है कि इस बार पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है। उनका कहना है कि पिछली बार प्रशासनिक स्तर पर भरोसा दिलाया गया, लेकिन मांगें अब तक अधूरी रहीं।
भूपेश बघेल का सरकार पर हमला
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धरना स्थल से राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “हमारी सरकार ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा किया। लेकिन भाजपा ने मितानिनों से केवल छल किया है। सरकार को चाहिए कि वह मितानिनों की मांगों पर तुरंत सकारात्मक फैसला ले। हम उनके साथ खड़े हैं।”
संभागवार आंदोलन की रणनीति
मितानिन संघ की प्रदेश अध्यक्ष सपना चौबे ने बताया कि आंदोलन को संभागवार रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।
9 अगस्त को दुर्ग संभाग की मितानिनें धरने में शामिल रहीं।
10 अगस्त को बिलासपुर संभाग,
11 अगस्त को सरगुजा और
12 अगस्त को बस्तर संभाग की मितानिनें रायपुर पहुंचेंगी।
रक्षाबंधन पर भी आंदोलन जारी
रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक त्योहार के बावजूद मितानिनों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि “इस बार मांगें पूरी होने तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा।”
धरना स्थल पर पुलिस बल की तैनाती भी की गई है, क्योंकि लगातार मितानिनों की संख्या बढ़ती जा रही है। मितानिन संघ की पदाधिकारी सपना चौबे ने कहा कि अब सरकार के लिखित आदेश के बिना कोई समझौता नहीं होगा।
भाजपा सरकार पर वादा-खिलाफी का आरोप
सपना चौबे का आरोप है कि भाजपा ने चुनाव से पहले मितानिनों को NHM में शामिल करने और मानदेय बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन दो साल बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।









