Zelensky Ukraine Trump: रूस-यूक्रेन युद्ध एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और आगामी चुनावों के प्रमुख दावेदार डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादास्पद शांति प्रस्ताव रखा। उन्होंने यूक्रेन से अपेक्षा जताई कि वह अपनी कुछ जमीन रूस को सौंप दे। इस पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि “किसी भी हालत में रूस को अपनी जमीन नहीं देंगे।”

ट्रंप का प्रस्ताव और जेलेंस्की की प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर घोषणा की कि वे 15 अगस्त को अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। उनका दावा है कि वे इस मुलाकात में यूक्रेन-रूस युद्ध समाप्त करने की दिशा में निर्णायक बातचीत करेंगे। ट्रंप का कहना है कि जिन क्षेत्रों पर फिलहाल रूस का कब्जा है, वे रूस को ही सौंप दिए जाएं – यही एकमात्र व्यावहारिक समाधान है।

ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद यूक्रेनी सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने सार्वजनिक बयान में कहा, “शांति का मतलब आत्मसमर्पण नहीं होता। हमारी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं होगा।”
युद्ध की पृष्ठभूमि
2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। अमेरिका सहित नाटो देश यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक सहायता दे रहे हैं, जबकि रूस डोनबास और क्रीमिया क्षेत्र पर अपने कब्जे को जायज़ ठहराता रहा है।
शांति की कई कोशिशों के बावजूद, सबसे बड़ा गतिरोध जमीन के मुद्दे पर ही बना हुआ है। रूस कब्जे वाले क्षेत्रों को अपना मानता है, जबकि यूक्रेन इन्हें अवैध और अस्थायी कब्जा बताता है।
आगे क्या?
15 अगस्त को प्रस्तावित ट्रंप-पुतिन बैठक पर वैश्विक निगाहें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप अपनी बातचीत में किस दिशा में पहल करते हैं, खासकर तब जब उनका प्रस्ताव खुद यूक्रेन के लिए अस्वीकार्य बताया जा चुका है। फिलहाल यूक्रेन की स्थिति साफ है – “देश की एक इंच जमीन भी नहीं जाएगी।” यह बयान न केवल यूक्रेनी जज़्बे को दर्शाता है, बल्कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों की दिशा भी तय करता है।










