Koradi temple accident: महाराष्ट्र के नागपुर जिले के कोराडी स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी जगदंबा मंदिर में शनिवार रात एक बड़ा निर्माण हादसा हुआ। मंदिर के निर्माणाधीन द्वार का स्लैब अचानक गिर पड़ा, जिससे नीचे काम कर रहे 17 मजदूर घायल हो गए। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। यह हादसा रात 8:00 से 8:15 बजे के बीच खापरखेड़ा-कोराडी मंदिर रोड पर हुआ।

हादसे के तुरंत बाद बचाव अभियान शुरू
जैसे ही घटना की जानकारी मिली, स्थानीय प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। घायलों को मलबे से निकालने के लिए रात भर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

कैसे हुआ हादसा?
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, घटना के समय निर्माण कार्य चालू था। मजदूर स्लैब के पास काम कर रहे थे, तभी स्लैब अचानक ढह गया, और कई मजदूर उसके नीचे दब गए। जिलाधिकारी विपिन इटनकर और पुलिस उपायुक्त निकेतन कदम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और राहत कार्यों की निगरानी की। हालांकि, स्लैब गिरने की सटीक वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है। विशेषज्ञों की एक टीम को बुलाया गया है जो तकनीकी कारणों की जांच कर रही है।
घायल मजदूरों की स्थिति
NMRDA (नागपुर मेट्रो रीजन डेवेलपमेंट अथॉरिटी) के महानगर आयुक्त संजय मीणा ने बताया कि हादसे में 15 से 17 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा, “अब तक किसी की मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तीन मजदूरों की स्थिति गंभीर है। कोराडी मंदिर का निर्माण एनएमआरडीए की निगरानी में ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा है। हादसे की विस्तृत जांच कराई जाएगी।”
प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती
घटना के समय मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी रत्नदीप रंगारी ने ANI को बताया, “हमने मलबे से 9 लोगों को बाहर निकाला। वे सभी खून से लथपथ थे। जैसे ही स्लैब गिरा, चारों ओर अफरातफरी मच गई। लोग चिल्ला रहे थे और मदद के लिए दौड़ रहे थे।”
निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया गया
प्रशासन ने ठेकेदारों से निर्माण स्थल की सुरक्षा मानकों पर रिपोर्ट मांगी है। जब तक तकनीकी जांच पूरी नहीं होती, मंदिर परिसर में सभी निर्माण कार्यों को स्थगित कर दिया गया है। साथ ही दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है।
प्रशासन सक्रिय, राहत कार्य जारी
घायलों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही प्रशासन ने उनके परिजनों को भी जानकारी दी है। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे कई जानें समय रहते बचाई जा सकीं।
यह हादसा न केवल निर्माण में संभावित लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि धार्मिक स्थलों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है।
कोराडी मंदिर हादसा एक चेतावनी है कि धार्मिक या सार्वजनिक स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यों में सख्त निगरानी और तकनीकी निरीक्षण अनिवार्य हैं। राहत की बात यह है कि त्वरित रेस्क्यू से कई जानें बच गईं, लेकिन अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर हैं, जो यह तय करेगी कि गुनहगार कौन है और लापरवाही किस स्तर पर हुई।











