Robert Vadra ED : रॉबर्ट वाड्रा पर ED का बड़ा खुलासा, अवैध रूप से कमाए 58 करोड़, गुरुग्राम जमीन घोटाले में 43 संपत्तियां जब्त

Robert Vadra ED : कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में संदिग्ध जमीन सौदे के जरिए वाड्रा ने कथित तौर पर 58 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की। ईडी ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में आरोप लगाया है कि यह राशि स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा. लि. और ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्रा. लि. जैसी कंपनियों के माध्यम से हासिल की गई थी। क्या है मामला? यह मामला वर्ष 2006 से 2008 के बीच गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में जमीन की खरीद, फिर उस पर हाउसिंग लाइसेंस जारी कराने और बाद में जमीन को DLF जैसी कंपनी को ऊंची कीमत पर बेचने से जुड़ा है। ईडी के अनुसार, स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने केवल 7.5 करोड़ रुपये में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी, जबकि असली कीमत करीब 15 करोड़ रुपये थी। लाइसेंस प्रक्रिया में गलत दस्तावेज, झूठे दावे और फाइल में फेरबदल के आरोप भी लगाए गए हैं। बाद में उसी जमीन को DLF को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। इससे हुई कमाई को वाड्रा ने संपत्तियों में निवेश किया। ईडी का आरोप और जांच में खुलासे रॉबर्ट वाड्रा को अपराध से जुड़ी आय के रूप में 58 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इनमें से 53 करोड़ रुपये स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और 5 करोड़ रुपये ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्रा. लि. के माध्यम से भेजे गए। यह धनराशि अचल संपत्तियों की खरीद, कंपनियों की देनदारियों का भुगतान और निजी खर्चों में इस्तेमाल की गई। ईडी ने 43 अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं, जिनकी कीमत 38.69 करोड़ रुपये बताई गई है। राजस्थान के बीकानेर की जमीन गुरुग्राम के गुड अर्थ सिटी सेंटर में इकाइयां मोहाली के बेस्टेक बिजनेस टॉवर में फ्लैट्स अहमदाबाद के जय अम्बे टाउनशिप में आवासीय इकाइयां नोएडा और फरीदाबाद में संपत्तियां शामिल हैं। वाड्रा की सफाई और पूछताछ ईडी ने अप्रैल 2025 में रॉबर्ट वाड्रा से दो बार पूछताछ की — 15 और 16 अप्रैल को। पूछताछ के दौरान वाड्रा ने अपने ऊपर लगे आरोपों से बचते हुए जिम्मेदारी तीन दिवंगत व्यक्तियों — एचएल पाहवा, राजेश खुराना और महेश नागर — पर डाल दी। उन्होंने दावा किया कि ये लोग उनके लिए काम करते थे। हालांकि, जब ईडी ने इस संबंध में सबूत मांगे, तो वाड्रा कोई दस्तावेज या वैध प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। कानूनी प्रक्रिया और संभावित सज़ा ईडी ने मामले में PMMLA की धारा 4 के तहत आरोप लगाए हैं, जिसके तहत अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 423 (दस्तावेजों में धोखाधड़ी) भी जोड़ी गई है। एफआईआर और आरोपियों की सूची इस मामले की शुरुआत 1 सितंबर 2018 को हरियाणा पुलिस द्वारा गुरुग्राम के खेड़की दौला थाने में दर्ज एफआईआर से हुई थी। इसमें रॉबर्ट वाड्रा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, डीएलएफ लिमिटेड और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्रा. लि. के अलावा कई अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। घोटाले का तरीका कम पूंजी वाली कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने कम कीमत पर जमीन खरीदी। झूठा सेल डीड तैयार कर चेक भुगतान का दावा किया गया, जो कभी क्लियर नहीं हुआ। स्टाम्प ड्यूटी बचाने के लिए गलत जानकारी दी गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री से प्रभाव का उपयोग कर लाइसेंस दिलवाया गया। फाइल में तारीखें बदली गईं, नक्शों में फेरबदल हुआ। अंततः जमीन को DLF को ऊंचे दाम पर बेचकर 58 करोड़ की अवैध कमाई की गई। रॉबर्ट वाड्रा पर लगे ये गंभीर आरोप न सिर्फ उनके कारोबारी नेटवर्क को लेकर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी कांग्रेस के लिए एक चुनौती बन सकते हैं। ईडी की चार्जशीट और अब तक की जांच से यह स्पष्ट होता जा रहा है कि शिकोहपुर जमीन घोटाला एक गंभीर वित्तीय और संस्थागत भ्रष्टाचार का मामला है। अब यह अदालत पर निर्भर करेगा कि इन आरोपों पर क्या फैसला लिया जाता है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है। Read More  : Bhupesh Baghel : छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान, भूपेश बघेल बोले “वोट चोरी से बनी भाजपा सरकार”

Robert Vadra ED : कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में संदिग्ध जमीन सौदे के जरिए वाड्रा ने कथित तौर पर 58 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की। ईडी ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में आरोप लगाया है कि यह राशि स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा. लि. और ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्रा. लि. जैसी कंपनियों के माध्यम से हासिल की गई थी।

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क्या है मामला?

यह मामला वर्ष 2006 से 2008 के बीच गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में जमीन की खरीद, फिर उस पर हाउसिंग लाइसेंस जारी कराने और बाद में जमीन को DLF जैसी कंपनी को ऊंची कीमत पर बेचने से जुड़ा है। ईडी के अनुसार, स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने केवल 7.5 करोड़ रुपये में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी, जबकि असली कीमत करीब 15 करोड़ रुपये थी। लाइसेंस प्रक्रिया में गलत दस्तावेज, झूठे दावे और फाइल में फेरबदल के आरोप भी लगाए गए हैं।

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बाद में उसी जमीन को DLF को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। इससे हुई कमाई को वाड्रा ने संपत्तियों में निवेश किया।

ईडी का आरोप और जांच में खुलासे

रॉबर्ट वाड्रा को अपराध से जुड़ी आय के रूप में 58 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

इनमें से 53 करोड़ रुपये स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और 5 करोड़ रुपये ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्रा. लि. के माध्यम से भेजे गए।

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यह धनराशि अचल संपत्तियों की खरीद, कंपनियों की देनदारियों का भुगतान और निजी खर्चों में इस्तेमाल की गई।

ईडी ने 43 अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं, जिनकी कीमत 38.69 करोड़ रुपये बताई गई है।

राजस्थान के बीकानेर की जमीन

गुरुग्राम के गुड अर्थ सिटी सेंटर में इकाइयां

मोहाली के बेस्टेक बिजनेस टॉवर में फ्लैट्स

अहमदाबाद के जय अम्बे टाउनशिप में आवासीय इकाइयां

नोएडा और फरीदाबाद में संपत्तियां शामिल हैं।

वाड्रा की सफाई और पूछताछ

ईडी ने अप्रैल 2025 में रॉबर्ट वाड्रा से दो बार पूछताछ की — 15 और 16 अप्रैल को। पूछताछ के दौरान वाड्रा ने अपने ऊपर लगे आरोपों से बचते हुए जिम्मेदारी तीन दिवंगत व्यक्तियों — एचएल पाहवा, राजेश खुराना और महेश नागर — पर डाल दी। उन्होंने दावा किया कि ये लोग उनके लिए काम करते थे। हालांकि, जब ईडी ने इस संबंध में सबूत मांगे, तो वाड्रा कोई दस्तावेज या वैध प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।

कानूनी प्रक्रिया और संभावित सज़ा

ईडी ने मामले में PMMLA की धारा 4 के तहत आरोप लगाए हैं, जिसके तहत अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 423 (दस्तावेजों में धोखाधड़ी) भी जोड़ी गई है।

एफआईआर और आरोपियों की सूची

इस मामले की शुरुआत 1 सितंबर 2018 को हरियाणा पुलिस द्वारा गुरुग्राम के खेड़की दौला थाने में दर्ज एफआईआर से हुई थी। इसमें रॉबर्ट वाड्रा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, डीएलएफ लिमिटेड और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्रा. लि. के अलावा कई अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।

घोटाले का तरीका

कम पूंजी वाली कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने कम कीमत पर जमीन खरीदी।

झूठा सेल डीड तैयार कर चेक भुगतान का दावा किया गया, जो कभी क्लियर नहीं हुआ।

स्टाम्प ड्यूटी बचाने के लिए गलत जानकारी दी गई।

तत्कालीन मुख्यमंत्री से प्रभाव का उपयोग कर लाइसेंस दिलवाया गया।

फाइल में तारीखें बदली गईं, नक्शों में फेरबदल हुआ।

अंततः जमीन को DLF को ऊंचे दाम पर बेचकर 58 करोड़ की अवैध कमाई की गई।

रॉबर्ट वाड्रा पर लगे ये गंभीर आरोप न सिर्फ उनके कारोबारी नेटवर्क को लेकर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी कांग्रेस के लिए एक चुनौती बन सकते हैं। ईडी की चार्जशीट और अब तक की जांच से यह स्पष्ट होता जा रहा है कि शिकोहपुर जमीन घोटाला एक गंभीर वित्तीय और संस्थागत भ्रष्टाचार का मामला है। अब यह अदालत पर निर्भर करेगा कि इन आरोपों पर क्या फैसला लिया जाता है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।

Read More  : Bhupesh Baghel : छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान, भूपेश बघेल बोले “वोट चोरी से बनी भाजपा सरकार”

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