EVM controversy : राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों के बीच शरद पवार-उद्धव ठाकरे ने EVM मैनेजमेंट की पोल खोली

 EVM controversy : महाराष्ट्र में चुनावी राजनीति गरमाई हुई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव में वोट चोरी के आरोप लगाने के बाद, अब महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के दो बड़े दलों—एनसीपी और शिवसेना (उद्धव ठाकरे समूह) ने भी चुनावी प्रक्रिया में कथित ईवीएम मैनेजमेंट को लेकर गंभीर दावे किए हैं।

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शरद पवार का बड़ा दावा

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शनिवार को खुलासा किया कि नवंबर 2024 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले, दो अज्ञात व्यक्तियों ने उनसे संपर्क किया था। इन लोगों ने दावा किया था कि वे ईवीएम मैनेजमेंट के जरिए एमवीए को 288 में से 160 सीटें जीताने में मदद कर सकते हैं। शरद पवार ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया क्योंकि एमवीए निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव पर भरोसा करता है। हालांकि, उन्होंने इन दोनों व्यक्तियों के नाम और उनके संगठन से जुड़ाव का खुलासा नहीं किया।

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उद्धव ठाकरे ने भी ठुकराया प्रस्ताव

रविवार को शिवसेना (यूबीटी) के नेता और उद्धव ठाकरे के करीबी संजय राउत ने इस मामले में सफाई दी। उन्होंने बताया कि वे उस बैठक में मौजूद थे जहां उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखते हैं और इस तरह के किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। राउत ने कहा कि ये वही दो लोग थे जिन्होंने शिवसेना को भी ईवीएम मैनेजमेंट के जरिए 60-65 “टफ” सीटों पर जीत दिलाने का ऑफर दिया था।

शिवसेना सांसद ने कहा कि लोकसभा चुनावों में एमवीए ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन छह महीने बाद हुए विधानसभा चुनावों में एमवीए को करारी हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने चुनावों में एमवीए की हार सुनिश्चित करने के लिए ईवीएम और मतदाता सूची में हेराफेरी करने की योजना बनाई थी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे राहुल गांधी से हाल ही में हुई मुलाकात का परिणाम बताया। उनका कहना था कि यह आरोप राजनीति को बदनाम करने की कोशिश है।

राजनीतिक सरगर्मी के बीच EVM पर सवाल

यह पहली बार नहीं है जब भारत में चुनावी प्रक्रिया में ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि निर्वाचन आयोग बार-बार ईवीएम की निष्पक्षता की पुष्टि करता रहा है, लेकिन विपक्षी दल इन आरोपों को लेकर चिंता जाहिर करते रहे हैं। इस बार कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के बड़े नेताओं द्वारा ईवीएम मैनेजमेंट का आरोप लगाना इस मुद्दे को फिर से तूल दे सकता है।

कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में चुनावी परिणामों में गड़बड़ी और वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने कई ऐसे मामले देखे हैं जहां वोटों की गिनती और रिकॉर्डिंग में अनियमितताएं हुई हैं। राहुल गांधी का कहना है कि यह लोकतंत्र के लिए खतरा है और इसकी जांच होनी चाहिए।

महाराष्ट्र की राजनीति पर असर

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के आरोप राजनीतिक तापमान बढ़ा सकते हैं। महाविकास आघाड़ी गठबंधन के लिए यह बड़ी चुनौती है कि वे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर जनता का भरोसा कायम रखें। वहीं, भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिए भी यह आरोपों को खारिज कर अपनी छवि सुधारने की जरूरत है। चुनावी ईमानदारी और लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल अब और अधिक गंभीर हो गए हैं। आगामी चुनावों में मतदाताओं का विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग और सरकार इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं और चुनाव प्रक्रिया को कितना पारदर्शी बनाए रखते हैं।

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